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SEBI: शेयर बेचकर अर्ली पे-इन करने पर उतनी राशि तक नए सौदों पर मार्जिन नहीं

SEBI ने क्लियरिंग कॉरपोरेशनों से कहा है कि बेचे गए शेयरों के स्वीकार किए गए अर्ली पे-इन की राशि तक ग्राहक के अगले खरीद-बिक्री सौदों पर मार्जिन न लिया जाए। यह 22 अक्टूबर 2026 से चार महीने बाद लागू होगा।

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आधिकारिक स्रोतSecurities and Exchange Board of India
बाज़ार / 22 अक्टूबर 2026

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने शेयर बेचकर उन्हें जल्दी सौंपने वाले निवेशकों के मार्जिन से जुड़ा नियम बदला है। 22 अक्टूबर 2026 के सर्कुलर में SEBI ने कहा कि क्लियरिंग कॉरपोरेशन, स्वीकार किए गए अर्ली पे-इन की राशि तक, ग्राहक के बाद के खरीद या बिक्री सौदों पर मार्जिन नहीं लेंगे। यह बदलाव सर्कुलर की तारीख से चार महीने बाद लागू होगा।

क्या हुआ

अर्ली पे-इन (EPI) का मतलब है कि ग्राहक बेचे गए शेयर निपटान की समय-सीमा से पहले ही सौंप देता है। मौजूदा एक्सचेंज दिशानिर्देशों के तहत, स्वीकार किए गए EPI में ब्लॉक किए गए शेयर उस बिक्री के मार्जिन के रूप में गिने जा सकते हैं, और बिक्री मूल्य का इस्तेमाल दूसरी पोज़ीशन के मार्जिन के लिए हो सकता है।

SEBI ने कहा कि यह नया कदम ब्रोकरों के मंच Broker ISF के प्रस्तावों, अपनी रिस्क मैनेजमेंट रिव्यू कमेटी की सिफारिशों और आंतरिक विचार-विमर्श के बाद तय किया गया। जहां किसी निपटान में ग्राहक की शुद्ध बिक्री देनदारी हो और क्लियरिंग कॉरपोरेशन ने EPI स्वीकार कर लिया हो, वहां क्लियरिंग कॉरपोरेशन रियल टाइम में ब्रोकर से ग्राहक के बाद के खरीद या बिक्री सौदों पर उस EPI राशि तक मार्जिन नहीं लेगा।

सर्कुलर के अनुसार, ट्रेड की तारीख पर उपलब्ध EPI मूल्य, किए गए EPI या बेचे गए शेयरों के मूल्य में से जो कम हो, वह होगा। अगर ग्राहक उस बिक्री को स्क्वेयर ऑफ करता है जिसके लिए EPI का फायदा लिया गया, तो यह मूल्य हटा दिया जाएगा और इससे होने वाली मार्जिन की कमी ब्रोकर के अपने कोलैटरल से ब्लॉक की जाएगी। यह ट्रेड-फॉर-ट्रेड शेयरों पर लागू नहीं होगा, क्योंकि उनका निपटान ग्रॉस आधार पर होता है।

इसका क्या मतलब है

कैश सेगमेंट के निवेशकों के लिए, पहले से बेचे और जल्दी सौंपे गए शेयरों की रकम, स्वीकार किए गए EPI मूल्य तक, उसी दिन नए सौदों में अलग मार्जिन ब्लॉक के बिना काम आ सकेगी।

SEBI ने ब्रोकरों से यह भी कहा है कि ऐसी पोज़ीशन स्क्वेयर ऑफ करने या नई पोज़ीशन लेने की अनुमति तभी दें जब ग्राहक का ज़रूरी मार्जिन ब्रोकर के पास उपलब्ध हो। इसलिए निवेशक उम्मीद करें कि ब्रोकर के सिस्टम ऐसे सौदों से पहले मार्जिन जांचेंगे।

क्लियरिंग कॉरपोरेशनों को अपने नियम बदलने, सिस्टम में बदलाव करने और ये प्रावधान अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करने होंगे। सर्कुलर 22 अक्टूबर 2026 से चार महीने बाद लागू होगा।

स्रोत: SEBI circular

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।