कार्रवाई

छात्रों की 85.79 करोड़ रुपये फीस के मामले में ED ने FIITJEE के खिलाफ PMLA शिकायत दायर की

प्रवर्तन निदेशालय ने FIITJEE और उसके दो निदेशकों के खिलाफ गाजियाबाद की अदालत में अभियोजन शिकायत दायर की है। ED का आरोप है कि छात्रों की 85.79 करोड़ रुपये की फीस का दुरुपयोग हुआ।

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आधिकारिक स्रोतEnforcement Directorate
कार्रवाई / 16 अक्टूबर 2026

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने FIITJEE Limited और उसके दो निदेशकों के खिलाफ गाजियाबाद की विशेष PMLA अदालत में अभियोजन शिकायत दायर की है। यह जानकारी ED की 15 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति में दी गई है। एजेंसी का आरोप है कि छात्रों से ली गई फीस में से 85.79 करोड़ रुपये रोके गए और उनका दुरुपयोग किया गया। ED ने अदालत से 71.88 करोड़ रुपये की संपत्ति ज़ब्त करने की मांग की है।

क्या हुआ

ED के लखनऊ ज़ोनल कार्यालय ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और भोपाल में पुलिस द्वारा दर्ज चार एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। ED के अनुसार, इन एफआईआर में आरोप है कि FIITJEE ने JEE जैसी परीक्षाओं के दो से चार साल के कोचिंग कार्यक्रमों के लिए हर छात्र से 2.8 लाख से 3.5 लाख रुपये तक की फीस पहले ही ले ली, और वेतन न मिलने पर शिक्षकों के जाने के बाद केंद्र बिना सूचना के बंद हो गए।

ED का कहना है कि उसकी जांच में पाया गया कि FIITJEE ने मई 2024 से फरवरी 2025 के बीच 32 केंद्र बंद कर दिए, जिससे 14,411 नामांकित छात्र उस कोचिंग से वंचित रह गए जिसकी फीस वे दे चुके थे, और कंपनी मार्च 2029 तक चलने वाले कार्यक्रमों में भी दाखिले लेती रही। एजेंसी ने 85.79 करोड़ रुपये की उस फीस को अपराध की आय माना है, जिसके रोके जाने और दुरुपयोग का वह आरोप लगाती है।

ED के अनुसार, दोनों निदेशकों ने 2022-23 से 24.92 करोड़ रुपये वेतन के रूप में लिए, जबकि अन्य कर्मचारियों का वेतन देर से दिया गया। एजेंसी ने पहले सात परिसरों की तलाशी लेकर 10 लाख रुपये नकद और 4.86 करोड़ रुपये के गहने ज़ब्त किए थे, और 9 अक्टूबर 2026 को 66.92 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की थी। PMLA के तहत अस्थायी कुर्की की पुष्टि न्यायनिर्णायक प्राधिकरण को करनी होती है। नोएडा पुलिस इस मामले में चार्जशीट दायर कर चुकी है, और ED के अनुसार उसकी जांच जारी है।

ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष साबित होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

इसका क्या मतलब है

जिन परिवारों ने पहले से फीस चुकाई थी, उनके लिए विज्ञप्ति यह नहीं बताती कि कोई पैसा लौटाया जाएगा या नहीं। ED ने अदालत से आरोपियों को दोषी ठहराने और ज़ब्त व कुर्क की गई 71.88 करोड़ रुपये की संपत्ति को ज़ब्त करने की मांग की है। जिन छात्रों और अभिभावकों की फीस वापस नहीं हुई है, वे राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) या e-Daakhil के ज़रिए उपभोक्ता शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

स्रोत: Enforcement Directorate press release

यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।

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