कानूनी

उत्तराखंड उपभोक्ता आयोग: Oriental Insurance ने कार में आग का दावा गलत ठुकराया

उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कहा कि Oriental Insurance ने एक कार मालिक का दावा गलत तरीके से ठुकराया, लेकिन मुआवज़ा 3,50,000 से घटाकर सर्वेयर की सहमत राशि 2,69,000 रुपये कर दिया।

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आधिकारिक स्रोतConsumer commission
कानूनी / 22 अक्टूबर 2026

उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कहा है कि The Oriental Insurance Company Limited ने आग में नष्ट हुई कार के मालिक का दावा गलत तरीके से ठुकराया। 13 अक्टूबर 2026 को सुनाए गए आदेश में आयोग ने मुआवज़ा 3,50,000 रुपये से घटाकर 2,69,000 रुपये कर दिया, लेकिन पहले दिया गया ब्याज और मुकदमे का खर्च बरकरार रखा।

क्या हुआ

काशीपुर के कार मालिक ने मई 2016 से मई 2017 तक के लिए अपनी कार का बीमा Oriental Insurance से 3,25,000 रुपये के इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू (IDV) पर कराया था। IDV मोटे तौर पर कार का बीमित बाज़ार मूल्य होता है। शिकायत के अनुसार, 20 अगस्त 2016 को एक जानवर को बचाने की कोशिश में कार सड़क से उतर गई और उसमें आग लग गई। जांच में घटना पर संदेह जताए जाने के बाद बीमा कंपनी ने दावा "नो क्लेम" कहकर खारिज कर दिया।

मार्च 2022 में उधम सिंह नगर के जिला आयोग ने बीमा कंपनी को 3,50,000 रुपये, शिकायत दर्ज होने की तारीख से 7% सालाना ब्याज, और 5,000 रुपये मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया। बीमा कंपनी ने अपील की, और उसके वकील ने अंत में केवल राशि पर ही आपत्ति की।

राज्य आयोग ने कहा कि मुआवज़ा किसी भी हाल में 3,25,000 रुपये के IDV से ज़्यादा नहीं हो सकता। आयोग ने नोट किया कि बीमा कंपनी के अपने सर्वेयर ने नेट-ऑफ-साल्वेज आधार पर नुकसान 2,69,000 रुपये आंका था और इसके भुगतान की सिफारिश की थी। कार मालिक ने 16 अप्रैल 2017 को इसी राशि पर दावा निपटाने की लिखित सहमति दी थी।

चूंकि बीमा कंपनी ने न तो यह सहमत राशि दी और न दावा स्वीकार किया, आयोग ने कहा कि सेवा में कमी थी। आयोग ने कहा कि जिला आयोग का ब्याज और मुकदमे का खर्च देना सही था। उसने मुआवज़ा घटाकर 2,69,000 रुपये किया और पिछले आदेश का बाकी हिस्सा बरकरार रखा।

इसका क्या मतलब है

इस आदेश के अनुसार, वाहन मालिकों के लिए दो बातें अहम हैं। क्षतिग्रस्त कार का मुआवज़ा उसके IDV तक सीमित है, इसलिए पॉलिसी में दर्ज IDV मायने रखता है। और जब बीमा कंपनी का सर्वेयर नुकसान आंक चुका हो और मालिक उस राशि पर सहमत हो, तो उसे न चुकाना सेवा में कमी माना गया।

यह आयोग का निष्कर्ष है और इसके खिलाफ अपील की जा सकती है। उपभोक्ता राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 से मदद ले सकते हैं या e-Daakhil पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

स्रोत: Consumer commission order

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।