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तेलंगाना हाई कोर्ट ने ED द्वारा कुर्क Karvy संपत्तियां HDFC Bank को लौटाने का आदेश रद्द किया

तेलंगाना हाई कोर्ट ने कहा कि विशेष अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय होने से पहले ही ED द्वारा कुर्क Karvy की संपत्तियां और शेयर HDFC Bank को लौटाने का गलत आदेश दिया।

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आधिकारिक स्रोतTelangana High Court
Timeline of the Karvy case: HDFC Bank's police complaints in 2021, ED's provisional attachment on 8 March 2022, Rs 686.53 crore outstanding as of 30 June 2025, the special court's release order on 29 December 2025, and the High Court setting it aside on 2 November 2026.
ओक्विलिया ग्राफ़िक। स्रोत: Telangana High Court judgment, 2 November 2026

तेलंगाना हाई कोर्ट ने 2 नवंबर 2026 को हैदराबाद की विशेष अदालत का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसके तहत HDFC Bank को वे संपत्तियां और KFin Technologies के शेयर वापस मिलने थे, जिन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने Karvy Stock Broking Limited के खिलाफ अपने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कुर्क किया था। कोर्ट ने कहा कि यह रिहाई जल्दबाजी में हुई, क्योंकि मुकदमे में अभी आरोप तय नहीं हुए थे।

क्या हुआ

आदेश के अनुसार, HDFC Bank ने 2021 में हैदराबाद में दो पुलिस शिकायतें दर्ज कराई थीं: एक Karvy Stock Broking और उसके निदेशकों के खिलाफ, जिसमें 329 करोड़ रुपये की राशि शामिल है, और दूसरी Karvy Comtrade और उसके निदेशकों के खिलाफ, जिसमें 7.06 करोड़ रुपये शामिल हैं। इसके बाद ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामला शुरू किया और 8 मार्च 2022 को कई संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कीं, जिनमें बैंक के पास गिरवी रखी संपत्तियां भी थीं। बैंक ने कोर्ट को बताया कि 30 जून 2025 तक 686.53 करोड़ रुपये बकाया थे।

29 दिसंबर 2025 को विशेष अदालत ने ED को निर्देश दिया था कि गिरवी रखी संपत्तियां और गिरवी शेयर HDFC Bank को लौटाए जाएं। बैंक को केवल अपने बकाये के बराबर हिस्सा बेचना था और बाकी मुकदमा चलने तक वापस सौंपना था। Karvy Stock Broking समेत नौ याचिकाकर्ताओं ने इस आदेश को चुनौती दी।

हाई कोर्ट ने कहा कि PMLA और उसके 2016 के संपत्ति वापसी नियमों के तहत मुकदमे के दौरान कुर्क संपत्ति तभी लौटाई जा सकती है, जब आरोप तय हो चुके हों, और उससे पहले दो अखबारों, एक अंग्रेजी और एक स्थानीय भाषा में, नोटिस छापकर हर दावेदार को सामने आने का मौका दिया जाए। आरोप तय नहीं हुए थे और कोई नोटिस नहीं छपा था। कोर्ट ने विशेष अदालत के आदेश को यांत्रिक बताते हुए रद्द कर दिया। उसने खरीदारों के एक समूह की वह अलग अर्जी भी खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने मामले में पक्षकार बनने की मांग की थी।

ED के आरोपों की परख अभी मुकदमे में होनी है। ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष साबित होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

इसका क्या मतलब है

यह फैसला बताता है कि कोई कर्जदाता ED द्वारा कुर्क संपत्ति कब वापस पा सकता है। उसे आरोप तय होने तक इंतजार करना होगा, और पहले दूसरे दावेदारों को सार्वजनिक रूप से सुनवाई का मौका मिलना चाहिए। इस मामले में ED ने कोर्ट को बताया कि कुर्क संपत्तियों पर दूसरे बैंकों, वित्तीय संस्थानों और व्यक्तियों के भी दावे हैं, इसलिए अखबार में नोटिस से उन्हें अपने दावे कोर्ट के सामने रखने का मौका मिलता है।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।