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तेलंगाना हाईकोर्ट ने Telangana Grameena Bank की नीलामी रोकने की कर्जदारों की याचिका खारिज की

तेलंगाना हाईकोर्ट ने Telangana Grameena Bank के नीलामी नोटिस के खिलाफ कर्जदारों की रिट याचिका खारिज कर दी; अदालत ने कहा कि उन्होंने अपील का रास्ता नहीं अपनाया और ट्रिब्यूनल का पुराना आदेश छिपाया।

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आधिकारिक स्रोतTelangana High Court
Heavy round steel door of a bank vault

फ़ोटो: Spamguy at English Wikipedia / Wikimedia Commons, CC BY 2.5 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।

तेलंगाना हाईकोर्ट ने 29 अक्टूबर 2026 को तीन कर्जदारों की वह रिट याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने SARFAESI कानून के तहत Telangana Grameena Bank को उनकी गिरवी संपत्ति की नीलामी से रोकने की मांग की थी। खंडपीठ ने कहा कि कर्जदारों ने कानून में दी गई अपील का इस्तेमाल नहीं किया और ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT) के एक पुराने आदेश को छिपाया।

क्या हुआ

कर्जदारों ने बैंक के पास गिरवी रखी एक संपत्ति के लिए 27 सितंबर 2026 के ई-नीलामी-सह-बिक्री नोटिस को चुनौती दी थी। अदालत ने नोट किया कि नीलामी 29 अक्टूबर 2026 को होनी थी और उन्होंने याचिका 28 अक्टूबर 2026 को दायर की, यानी नोटिस छपने के एक महीने से ज्यादा बाद।

बैंक के वकील ने अदालत को बताया कि एक कर्जदार पहले ही हैदराबाद के DRT में जा चुका था। 11 अगस्त 2026 को ट्रिब्यूनल ने संपत्ति पर आगे की कार्यवाही पर इस शर्त के साथ रोक लगाई थी कि कर्ज खाते में 20 लाख रुपये दो बराबर किस्तों में, 25 अगस्त 2026 और 8 सितंबर 2026 तक जमा किए जाएं। बैंक के मुताबिक कोई रकम जमा नहीं हुई, इसलिए 8 सितंबर 2026 के बाद यह सुरक्षा खत्म हो गई।

अदालत ने याचिका खारिज करने के तीन कारण बताए। पहला, कर्जदारों ने SARFAESI कानून की धारा 18 के तहत ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील नहीं की और इसकी कोई ठोस वजह नहीं बताई। दूसरा, उन्होंने DRT का सशर्त आदेश छिपाया, और अदालत के मुताबिक यह अकेले ही याचिका को खर्च के साथ खारिज करने के लिए काफी था; उनके वकील को इसकी जानकारी न होने से यह बात नहीं बदलती। तीसरा, ऐसी कोई असाधारण परिस्थिति नहीं थी जिसके लिए हाईकोर्ट अपने रिट अधिकार का इस्तेमाल करे। अदालत ने खर्च का कोई आदेश नहीं दिया।

इसका क्या मतलब है

यह फैसला दिखाता है कि SARFAESI नीलामी का सामना कर रहे कर्जदार से उम्मीद की जाती है कि वह हाईकोर्ट जाने से पहले कानून में बनाए गए ट्रिब्यूनल, यानी DRT और फिर अपीलीय ट्रिब्यूनल, का रास्ता अपनाए। जमा राशि की शर्त पर मिली रोक तभी बनी रहती है जब रकम समय पर जमा हो। अदालत जाने वाले कर्जदार को उसी विवाद में पहले हुए हर आदेश की जानकारी देनी होती है; एक आदेश छिपाना भी केस हारने के लिए काफी हो सकता है। बैंक की सेवा से जुड़ी शिकायत के लिए कर्जदार RBI से https://cms.rbi.org.in पर भी संपर्क कर सकता है।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।