कार्रवाई
तेलंगाना ACB ने मोसम गांव के अधिकारी डी. श्रीनिवास को 22,000 रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा
तेलंगाना ACB के अनुसार, मंचेरियल जिले के मोसम गांव के ग्राम पालना अधिकारी को 29 अक्टूबर 2026 को 22,000 रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया।
तेलंगाना के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की प्रेस नोट के अनुसार, मंचेरियल जिले के मोसम गांव के ग्राम पालना अधिकारी (GPO) डी. श्रीनिवास को 29 अक्टूबर 2026 को 22,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। यह ट्रैप कार्रवाई ACB की आदिलाबाद रेंज ने की।
क्या हुआ
ACB के अनुसार, अधिकारी ने एक शिकायतकर्ता से राजस्व रिकॉर्ड में उसके पिता का नाम सुधारने के लिए उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजने के बदले 22,000 रुपये मांगे और लिए। ब्यूरो के मुताबिक, इस सुधार से शिकायतकर्ता और उसके भाई को खेती की जमीन का उत्तराधिकार मिल पाता।
ACB ने कहा कि ट्रैप के दौरान अधिकारी ने अपने कार्यालय में पैसे लिए और रिश्वत की रकम उनके कब्जे से बरामद की गई। ब्यूरो का आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर सरकारी काम में पक्ष दिखाने के लिए यह रकम मांगी और ली।
ACB ने बताया कि अधिकारी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड के लिए करीमनगर में SPE और ACB मामलों के विशेष न्यायाधीश के सामने पेश किया जा रहा है। ब्यूरो के अनुसार मामले की जांच जारी है और सुरक्षा कारणों से शिकायतकर्ता का ब्योरा गोपनीय रखा गया है।
ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
इसका क्या मतलब है
यह मामला ऐसी सेवा से जुड़ा है जिसकी कई ग्रामीण परिवारों को जरूरत पड़ती है: राजस्व रिकॉर्ड में नाम सुधारना, ताकि खेती की जमीन वारिसों को मिल सके। ACB का कहना है कि रिश्वत मांगे जाने की शिकायत करने वाले का नाम और ब्योरा गुप्त रखा जाता है।
तेलंगाना ACB ने लोगों से कहा है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी रिश्वत मांगे तो टोल फ्री नंबर 1064 पर संपर्क करें। प्रेस नोट के अनुसार ब्यूरो से व्हाट्सएप 9440446106 पर और फेसबुक व X पर Telangana ACB के नाम से भी संपर्क किया जा सकता है, और उसका QR कोड सरकारी दफ्तरों में लगा है। सभी राज्यों की हेल्पलाइन Oquilia की गाइड https://www.oquilia.com/report-a-bribe पर उपलब्ध हैं।
स्रोत: Telangana ACB press note
यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।
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