कानूनी

सुप्रीम कोर्ट ने दो होटल कंपनियों पर दिवाला कार्यवाही बरकरार रखी

सुप्रीम कोर्ट ने Omkara Asset Reconstruction की दो होटल कंपनियों के खिलाफ दिवाला याचिकाओं की स्वीकृति के विरुद्ध अपीलें खारिज कीं। कोर्ट ने कहा कि सूचना उपयोगिता में दर्ज डिफ़ॉल्ट का रिकॉर्ड पर्याप्त सबूत है।

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आधिकारिक स्रोतSupreme Court of India
कानूनी / 16 अक्टूबर 2026

सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर 2026 को दो अपीलें खारिज करते हुए GSTAAD Hotels Pvt. Ltd. और Neo Capricorn Plaza Pvt. Ltd. के खिलाफ दिवाला कार्यवाही को बरकरार रखा। ये याचिकाएं Omkara Asset Reconstruction Pvt. Ltd. ने उन कर्ज़ों को लेकर दायर की थीं, जिन पर करीब 665.75 करोड़ रुपये के डिफ़ॉल्ट का दावा है। कोर्ट ने कहा कि सूचना उपयोगिता द्वारा जारी डिफ़ॉल्ट का रिकॉर्ड अपने आप में डिफ़ॉल्ट का पर्याप्त सबूत है।

क्या हुआ

फैसले के अनुसार, Piramal Finance Ltd. ने 2017 में इन दोनों कंपनियों को 600 करोड़ रुपये के कर्ज़ दिए थे। ये कंपनियां बेंगलुरु का JW Marriott Hotel और पुणे का Crowne Plaza Hotel चलाती हैं। दिसंबर 2022 में ये कर्ज़ और आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना की दो सुविधाएं Omkara को सौंप दी गईं। Omkara ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 की धारा 7 के तहत याचिकाएं दायर कीं और डिफ़ॉल्ट की तारीख 15 नवंबर 2022 बताई।

मुंबई स्थित राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण ने 8 जुलाई 2025 को याचिकाएं स्वीकार कीं और अपीलीय न्यायाधिकरण ने 19 अगस्त 2025 को इसे सही ठहराया। सुप्रीम कोर्ट ने अपीलों में कोई दम नहीं पाया और आदेश दिया कि कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया, यानी कंपनी के कर्ज़ सुलझाने की औपचारिक प्रक्रिया, आगे चलेगी।

कोर्ट ने कहा कि धारा 7 एक संक्षिप्त प्रक्रिया है, जिसमें डिफ़ॉल्ट का फैसला संभावनाओं के संतुलन के आधार पर होता है, न कि खातों के विस्तृत मिलान से। कोर्ट के अनुसार, सूचना उपयोगिता, यानी कर्ज़ के आंकड़ों का एक विनियमित भंडार, से मिला डिफ़ॉल्ट रिकॉर्ड एक मज़बूत अनुमान बनाता है, जिसे केवल स्पष्ट और ठोस सामग्री से ही खारिज किया जा सकता है, सिर्फ इनकार से नहीं। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी कंपनी का मुनाफा इस बात के लिए प्रासंगिक नहीं है कि वह कर्ज़ चुका सकती है या नहीं। कोर्ट ने ध्यान दिलाया कि कर्ज़दार के अपने खातों के अनुसार उसकी आंतरिक कमाई 2022-23 की कर्ज़ देनदारियों का केवल 12 प्रतिशत ही पूरा करती थी।

इसका क्या मतलब है

यह फैसला बताता है कि कर्ज़दाताओं द्वारा दायर मामलों में दिवाला न्यायाधिकरणों को डिफ़ॉल्ट के सबूत को कैसे देखना चाहिए। फैसले के अनुसार, सूचना उपयोगिता में दर्ज डिफ़ॉल्ट याचिका स्वीकार करने के चरण में पर्याप्त है, और कर्ज़दार केवल परिचालन मुनाफे का हवाला देकर इसका विरोध नहीं कर सकते।

कोर्ट ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2026 का भी ज़िक्र किया, जिसके तहत डिफ़ॉल्ट दिखने और आवेदन पूरा होने पर न्यायाधिकरण धारा 7 का आवेदन स्वीकार करेंगे।

स्रोत: Supreme Court judgment

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