कानूनी
सुप्रीम कोर्ट ने IFFCO Tokio को दो सड़क दुर्घटना पीड़ितों को अधिक मुआवजा देने का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर 2026 को स्कूटर दुर्घटना के दो पीड़ितों का मुआवजा बढ़ाया और कहा कि मुआवजा केवल मेडिकल प्रमाणपत्र से नहीं, बल्कि वास्तविक कार्यात्मक विकलांगता के आधार पर तय होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर 2026 को केरल में 2016 की एक स्कूटर दुर्घटना में घायल हुए दो लोगों को IFFCO Tokio General Insurance Company Ltd द्वारा दिया जाने वाला मुआवजा बढ़ा दिया। अदालत ने केरल हाई कोर्ट द्वारा तय 36,22,644 रुपये और 27,70,664 रुपये की राशि को बढ़ाकर 77,84,394 रुपये और 69,60,880 रुपये कर दिया। अदालत ने कहा कि मुआवजा इस बात पर आधारित होना चाहिए कि चोट ने व्यक्ति के रोजमर्रा के जीवन और काम पर कितना असर डाला है, न कि केवल मेडिकल प्रमाणपत्र में लिखे विकलांगता के आंकड़े पर।
क्या हुआ
दोनों दावेदार, 43 वर्षीय पीछे बैठे सवार और स्कूटर चला रहे 22 वर्षीय युवक, 22 अक्टूबर 2016 को पलियेक्कारा टोल प्लाजा के पास एक दूसरे स्कूटर की टक्कर से घायल हुए थे। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने 2021 में उन्हें 19,91,954 रुपये और 16,03,400 रुपये दिए थे, और हाई कोर्ट ने जनवरी 2026 में यह राशि बढ़ाई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल विकलांगता और कार्यात्मक विकलांगता में अंतर किया। कार्यात्मक विकलांगता का अर्थ है वह वास्तविक नुकसान जो व्यक्ति रोजमर्रा के जीवन और कमाई में झेलता है। बड़े दावेदार के मामले में मेडिकल बोर्ड ने 75.5% विकलांगता प्रमाणित की थी। अदालत ने कहा कि जिस व्यक्ति को जीवन भर एक सहायक की जरूरत हो, वह 100% कार्यात्मक विकलांगता झेलता है। छोटे दावेदार के मामले में अदालत ने प्रमाणित 62% को बढ़ाकर 80% माना।
अदालत ने यह भी कहा कि सहायक (अटेंडेंट) के खर्च की गणना एक छोटी तय राशि के बजाय मल्टीप्लायर पद्धति से होनी चाहिए, यानी उसी फॉर्मूले से जो खोई आय के लिए इस्तेमाल होता है। इससे इस मद में 25,20,000 रुपये और 22,68,000 रुपये बने। अदालत ने भविष्य के इलाज के खर्च के लिए 10 लाख रुपये और 8 लाख रुपये, तथा छोटे दावेदार को विवाह की संभावनाओं के नुकसान के लिए 5 लाख रुपये मंजूर किए।
इसका क्या मतलब है
अतिरिक्त राशि, 41,61,750 रुपये और 41,90,216 रुपये, पर दावा याचिका दाखिल करने की तारीख से 6.5% सालाना ब्याज मिलेगा। अदालत ने बीमा कंपनी को यह राशि छह सप्ताह के भीतर न्यायाधिकरण में जमा करने का आदेश दिया है, और न्यायाधिकरण पहचान की जांच के बाद पैसा सीधे दावेदारों के बैंक खातों में भेजेगा।
दुर्घटना पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए यह फैसला दिखाता है कि अदालतें मेडिकल प्रमाणपत्र से आगे जाकर यह आकलन कर सकती हैं कि चोट ने व्यक्ति के जीने और कमाने की क्षमता पर कितना असर डाला है। जहां पीड़ित को जीवन भर देखभाल की जरूरत हो, वहां अदालत ने सहायक के खर्च को खोई आय की तरह गणना किए जाने वाले दीर्घकालिक नुकसान के रूप में माना।
स्रोत: Supreme Court judgment
यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।