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SEBI: FATF-अनुपालक देशों में रहने वाले NRI और OCI अब विदेश से डिजिटल KYC करा सकेंगे

SEBI ने KYC नियमों में ढील दी है। FATF-अनुपालक देशों में रहने वाले NRI, OCI कार्डधारक और विदेशी नागरिक 3 दिसंबर 2026 से विदेश से ही डिजिटल KYC पूरा कर सकेंगे।

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आधिकारिक स्रोतSecurities and Exchange Board of India
Steps under SEBI's new rule letting NRIs, OCI cardholders and foreign nationals in FATF-compliant countries complete KYC digitally from abroad from 3 December 2026: PAN check, passport copy, overseas address, and video verification safeguards.
ओक्विलिया ग्राफ़िक। स्रोत: SEBI circular, 4 November 2026

Financial Action Task Force (FATF) के मानकों का पालन करने वाले देशों में रहने वाले NRI, Overseas Citizens of India (OCI) और विदेशी नागरिक अब विदेश से ही किसी ब्रोकर या SEBI-पंजीकृत अन्य मध्यस्थ के पास अपना KYC डिजिटल तरीके से पूरा कर सकेंगे। SEBI ने 4 नवंबर 2026 के एक सर्कुलर में यह बदलाव घोषित किया। यह 3 दिसंबर 2026 से लागू होगा।

क्या हुआ

Know Your Client (KYC) वह पहचान जांच है जो खाता खोलने से पहले मध्यस्थ को करनी होती है। अब तक SEBI के KYC नियमों के तहत डिजिटल KYC के दौरान ग्राहक का भारत में मौजूद होना ज़रूरी था। इससे विदेश में रहने वाला व्यक्ति खाता खोलते समय यह प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी नहीं कर पाता था।

SEBI ने कहा कि अब FATF मानकों का पालन करने वाले देश में रहने वाले किसी व्यक्तिगत "person resident outside India" (NRI, OCI कार्डधारक या विदेशी नागरिक) के लिए यह शर्त ढीली कर दी गई है। मध्यस्थ ऐसे ग्राहक से डिजिटल रूप से भेजी गई KYC जानकारी और दस्तावेज़ स्वीकार कर सकता है।

सर्कुलर के अनुसार, मध्यस्थ ग्राहक के PAN का आयकर डेटाबेस से सत्यापन करेगा और पासपोर्ट की प्रति, तथा जहां लागू हो OCI कार्ड, लेगा। ऐसे ग्राहक का मौजूदा पता विदेश का पता होगा। मूल दस्तावेज़ न दिखाने पर ग्राहक DigiLocker, Aadhaar आधारित e-KYC, या नोटरी, भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावास, या कुछ बैंक अधिकारियों द्वारा सत्यापित प्रति का इस्तेमाल कर सकता है। वीडियो के ज़रिये व्यक्तिगत सत्यापन में ग्राहक का IP पता भारत या किसी FATF-अनुपालक देश का होना चाहिए और KYC फॉर्म में बताए देश से मेल खाना चाहिए, VPN और प्रॉक्सी सर्वर रोके जाने चाहिए, मध्यस्थ का एक अधिकारी मौजूद रहना चाहिए और प्रक्रिया का साथ-साथ ऑडिट होगा। किसी दूसरी भाषा के दस्तावेज़ों का अंग्रेज़ी अनुवाद कराकर सत्यापित कराना होगा।

इसका क्या मतलब है

FATF-अनुपालक देश में रहने वाले NRI या OCI निवेशक को ट्रेडिंग या डीमैट खाता खोलने, या दोबारा KYC कराने के लिए भारत आने का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा। KYC Registration Agency के पास रखे KYC रिकॉर्ड पोर्टेबल होंगे, यानी कोई दूसरा मध्यस्थ भी उन पर भरोसा कर सकेगा। FATF मानकों का पालन न करने वाले देशों के ग्राहकों पर मौजूदा KYC प्रक्रिया ही लागू रहेगी, और 3 दिसंबर 2026 से पहले पूरे हुए KYC पर पुराने नियम लागू रहेंगे। किसी मध्यस्थ के खिलाफ शिकायत https://scores.sebi.gov.in पर दर्ज की जा सकती है।

स्रोत: SEBI circular

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।