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IPO खुलासों पर SEBI ने Taurian MPS, निदेशकों और मर्चेंट बैंकर पर 18 लाख रुपये का जुर्माना लगाया

SEBI ने IPO ऑफर दस्तावेज में खुलासे की चूक पाते हुए Taurian MPS, उसके दो निदेशकों और मर्चेंट बैंकर Gretex Corporate Services पर कुल 18 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

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आधिकारिक स्रोतSecurities and Exchange Board of India
बाज़ार / 27 अक्टूबर 2026

SEBI के एक न्यायनिर्णायक अधिकारी ने Taurian MPS Ltd, उसके दो निदेशकों और उसके IPO के मर्चेंट बैंकर Gretex Corporate Services Ltd पर कंपनी के IPO ऑफर दस्तावेज में खुलासों को लेकर कुल 18 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। 27 अक्टूबर 2026 के आदेश में कंपनी पर 5 लाख रुपये, दोनों निदेशकों पर संयुक्त रूप से 5 लाख रुपये और Gretex पर 8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

क्या हुआ

आदेश के अनुसार, SEBI ने Taurian MPS के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) को लेकर एक शिकायत मिलने के बाद ऑफर दस्तावेज की जांच की। यह NSE Emerge प्लेटफॉर्म पर SME इश्यू था, जो 9 सितंबर 2025 को खुला और 16 सितंबर 2025 को सूचीबद्ध हुआ। कारण बताओ नोटिस में आरोप था कि कुछ प्रमोटर ग्रुप और गैर-प्रमोटर ग्रुप संस्थाओं के बारे में SEBI के ICDR नियमों के तहत खुलासे नहीं किए गए या पर्याप्त नहीं किए गए।

आदेश में पाया गया कि साबित हुआ उल्लंघन Taurian Engineering Pvt Ltd को प्रमोटर ग्रुप का हिस्सा न बताने और उसके परिसमापन (liquidation) की स्थिति का खुलासा न करने से जुड़ा है, जबकि ICDR नियमों में प्रमोटर ग्रुप मानने की शेयरधारिता सीमा पूरी होती थी। आदेश के अनुसार एक प्रमोटर ने 2012 से 2023 के बीच उस कंपनी में अपनी हिस्सेदारी 19% से बढ़ाकर 80% की। SEBI ने माना कि यह ऑफर दस्तावेज में ही खुलासे की चूक है, केवल आंतरिक अनुपालन की गलती नहीं।

नोटिस पाने वालों ने दलील दी कि शिकायतकर्ता ने शिकायत वापस ले ली थी, किसी निवेशक को नुकसान नहीं हुआ और NSE ने दस्तावेजों की जांच की थी। न्यायनिर्णायक अधिकारी ने माना कि किसी लाभ या निवेशक नुकसान का आकलन नहीं हुआ, लेकिन कहा कि उल्लंघन साबित होने पर SEBI अधिनियम की धारा 15HB के तहत न्यूनतम जुर्माना तय है, और Gretex के खिलाफ SEBI की चार पिछली कार्रवाइयों को भी ध्यान में रखा।

इसका क्या मतलब है

IPO में आवेदन का फैसला करते समय निवेशक ऑफर दस्तावेज पर ही भरोसा करते हैं, इसलिए SEBI प्रमोटर ग्रुप संस्थाओं और परिसमापन जैसे अहम तथ्यों का पूरा खुलासा जरूरी मानता है। आदेश के अनुसार जुर्माना आदेश मिलने के 45 दिन के भीतर भरना होगा, नहीं तो SEBI वसूली की कार्यवाही शुरू कर सकता है। SEBI का आदेश नियामक का निष्कर्ष है और इसके खिलाफ प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (SAT) में अपील की जा सकती है।

सूचीबद्ध कंपनियों या SEBI-पंजीकृत मध्यस्थों के खिलाफ शिकायत https://scores.sebi.gov.in पर की जा सकती है।

स्रोत: SEBI order

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।