कानूनी
SAT ने Magnox Infraprojects के पूर्व निदेशक के खिलाफ SEBI का रिफंड आदेश रद्द किया
प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण ने Magnox Infraprojects के एक पूर्व निदेशक के खिलाफ SEBI का 2018 का रिफंड आदेश रद्द कर दिया, यह कहते हुए कि नोटिस तामील होने का कोई सबूत नहीं है।
प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (SAT) ने 15 अक्टूबर 2026 को Magnox Infraprojects Limited के एक पूर्व निदेशक के खिलाफ SEBI का 20 फरवरी 2018 का आदेश रद्द कर दिया। 2018 के आदेश में उस पैसे की वापसी का निर्देश दिया गया था, जो SEBI के अनुसार कंपनी ने Companies Act, 1956 और प्रतिभूति कानूनों का उल्लंघन करते हुए रिडीमेबल प्रेफरेंस शेयरों के जरिए जुटाया था। SAT ने कहा कि ऐसी कोई सामग्री नहीं है जिससे पता चले कि पूर्व निदेशक को कारण बताओ नोटिस या आदेश तामील किया गया था।
क्या हुआ
SAT के आदेश के अनुसार, SEBI की जांच में पाया गया कि Magnox ने 2012-13 में रिडीमेबल प्रेफरेंस शेयर, यानी ऐसे शेयर जिन्हें कंपनी बाद में वापस खरीदने का वादा करती है, जारी करके 2,110 लोगों से 2.31 करोड़ रुपये जुटाए। कंपनी और उसके निदेशकों के खिलाफ 13 अगस्त 2015 के आदेश में SEBI ने इस पेशकश को प्रतिभूतियों का "पब्लिक इश्यू" माना था। इसके बाद SEBI ने 20 नवंबर 2015 को अपीलकर्ता समेत पहले के निदेशकों के खिलाफ अंतरिम आदेश पारित किया और फिर 2018 का आदेश आया।
अपीलकर्ता ने SAT को बताया कि उन्होंने सितंबर 2013 में निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था, उन्हें कारण बताओ नोटिस, सुनवाई का नोटिस या अंतिम आदेश कभी नहीं मिला, और उन्हें इसका पता तब चला जब वसूली शुरू हुई और उनके बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए। SEBI ने दलील दी कि अपील 2,948 दिनों की देरी से दायर की गई, नोटिस कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज पते पर भेजा गया था, और पैसा जुटाए जाने के समय अपीलकर्ता निदेशक थे।
SAT ने देरी को माफ कर दिया। उसने पाया कि SEBI द्वारा पेश की गई स्पीड पोस्ट पावती पर हस्ताक्षर अपीलकर्ता के हस्ताक्षर से मेल नहीं खाते, और कहा कि 2018 का आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करके पारित किया गया था। ये सिद्धांत कहते हैं कि किसी के खिलाफ आदेश से पहले उसकी बात सुनी जाए।
इसका क्या मतलब है
SAT ने 2018 का आदेश केवल इस अपीलकर्ता के संबंध में रद्द किया है। अपीलकर्ता को 16 नवंबर 2026 को SEBI के सामने पेश होना होगा, और SEBI को सुनवाई का मौका देकर कानून के अनुसार नया आदेश पारित करना होगा। SAT ने सभी दलीलें खुली रखी हैं, यानी उसने यह तय नहीं किया है कि अपीलकर्ता जिम्मेदार हैं या नहीं। SAT के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है।
यह फैसला दिखाता है कि SEBI का निर्देश किसी व्यक्ति पर ठीक से तामील होना जरूरी है। जिन पाठकों को गैर-सूचीबद्ध कंपनियां जमा जैसी योजनाओं की पेशकश करें, वे RBI के Sachet पोर्टल https://sachet.rbi.org.in पर इसकी शिकायत कर सकते हैं।
स्रोत: SAT order
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