कानूनी

SAT ने SEBI के सर्कुलर ट्रेडिंग जुर्माने में ब्रोकर का हिस्सा घटाकर 50,000 रुपये किया

प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण ने 7.5 लाख रुपये के जुर्माने के लिए Arcadia Share & Stock Brokers को संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराने वाले SEBI आदेश में बदलाव कर उसे 50,000 रुपये का आनुपातिक हिस्सा चुकाने की अनुमति दी।

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आधिकारिक स्रोतSecurities Appellate Tribunal
कानूनी / 24 अक्टूबर 2026

प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (SAT) ने 13 अक्टूबर 2026 को स्टॉकब्रोकर Arcadia Share & Stock Brokers Pvt. Ltd. की SEBI के जुर्माना आदेश के खिलाफ अपील आंशिक रूप से स्वीकार कर ली। SEBI ने ब्रोकर और 14 अन्य पर संयुक्त और पृथक रूप से 7.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था, यानी किसी से भी पूरी राशि वसूली जा सकती थी। SAT ने यह निर्देश बदलकर ब्रोकर को अपने आनुपातिक हिस्से के रूप में 50,000 रुपये चुकाने की अनुमति दी।

क्या हुआ

SEBI के एक न्यायनिर्णयन अधिकारी ने 28 दिसंबर 2022 को SEBI Act और धोखाधड़ी व अनुचित व्यापार प्रथाओं से जुड़े SEBI नियमों के उल्लंघन के लिए यह आदेश दिया था। SAT के आदेश के अनुसार, SEBI का आरोप था कि 7, 8 और 9 जनवरी 2019 को Darshan Orna शेयर में ब्रोकर के प्रोप्राइटरी सौदे 14 अन्य के साथ सर्कुलर ट्रेडिंग थे।

ब्रोकर ने SAT से कहा कि उसने शेयर में कारोबार किया था, पर सर्कुलर ट्रेडिंग में शामिल नहीं था, उसका बाकी 14 नोटिसियों से कोई संबंध नहीं है, और SEBI आदेश में किसी तीसरे पक्ष को नुकसान या अवैध लाभ दर्ज नहीं है। उसने मामला खत्म करने के लिए 50,000 रुपये का आनुपातिक जुर्माना चुकाने की पेशकश की। SEBI ने दलील दी कि संयुक्त जिम्मेदारी इसलिए तय की गई क्योंकि नोटिसियों ने मिलकर सर्कुलर ट्रेडिंग की थी। SEBI ने न्यायाधिकरण को बताया कि वसूली की कार्यवाही शुरू हुई है, पर अब तक कुछ वसूल नहीं हुआ है।

SAT ने कहा कि एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर सौदे स्क्रीन आधारित होते हैं, जिनमें खरीदार और विक्रेता अज्ञात रहते हैं। उसने माना कि SEBI आदेश में ब्रोकर और अन्य नोटिसियों के बीच कोई संबंध नहीं दिखाया गया और संयुक्त व पृथक जिम्मेदारी के समर्थन में कोई ठोस निष्कर्ष पेश नहीं किया गया। 18 मई 2023 के SAT के एक पुराने फैसले का पालन करते हुए उसने ब्रोकर को चार हफ्तों में 50,000 रुपये चुकाने की अनुमति दी। SEBI आदेश का बाकी हिस्सा जस का तस रहा।

इसका क्या मतलब है

यह फैसला दिखाता है कि जब SEBI कई पक्षों को एक ही जुर्माने के लिए संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराता है, तो SAT उन्हें जोड़ने वाले निष्कर्ष की तलाश कर सकता है; ऐसा निष्कर्ष न दिखाए जाने पर उसने एक पक्ष को सिर्फ अपना हिस्सा चुकाने दिया है। निवेशकों और बाजार भागीदारों के लिए, ब्रोकर के खिलाफ SEBI का निष्कर्ष कायम है, क्योंकि न्यायाधिकरण ने केवल जुर्माने के बंटवारे में बदलाव किया है। SAT के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है।

स्रोत: SAT order

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।