कार्रवाई
RBI ने सोनपेठ नागरी सहकारी बैंक पर पाबंदियां 30 जनवरी 2027 तक बढ़ाईं
RBI ने 28 अक्टूबर 2026 को कहा कि परभणी जिले के सोनपेठ नागरी सहकारी बैंक मर्यादित पर उसके निर्देश तीन महीने और, 30 जनवरी 2027 तक लागू रहेंगे।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने सोनपेठ नागरी सहकारी बैंक मर्यादित, सोनपेठ, जिला परभणी पर अपने निर्देशों की अवधि तीन महीने और बढ़ा दी है। 28 अक्टूबर 2026 की प्रेस विज्ञप्ति में RBI ने कहा कि ये निर्देश अब 30 जनवरी 2027 को कारोबार बंद होने तक लागू रहेंगे, और इनकी समीक्षा की जा सकती है।
क्या हुआ
RBI ने इस सहकारी बैंक को पहली बार 29 जुलाई 2025 को बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की Section 35A के साथ Section 56 के तहत निर्देश जारी किए थे। Section 35A के तहत RBI जनहित में किसी बैंक को बाध्यकारी निर्देश दे सकता है। मूल निर्देश छह महीने के लिए, 30 जनवरी 2026 को कारोबार बंद होने तक था। बाद में इसे बढ़ाया गया, और सबसे हाल में 22 जुलाई 2026 के निर्देश से इसे 30 अक्टूबर 2026 को कारोबार बंद होने तक बढ़ाया गया था।
RBI ने कहा कि वह संतुष्ट है कि जनहित में इस निर्देश को 30 अक्टूबर 2026 के बाद भी जारी रखना ज़रूरी है। इसलिए इसे 30 अक्टूबर 2026 को कारोबार बंद होने से 30 जनवरी 2027 को कारोबार बंद होने तक, तीन महीने और बढ़ाया गया है।
RBI ने यह भी कहा कि अवधि बढ़ाने या किसी बदलाव का अपने-आप यह मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि वह बैंक की वित्तीय स्थिति से संतुष्ट है। विज्ञप्ति के अनुसार, मूल निर्देश की बाकी सभी शर्तें पहले जैसी रहेंगी।
इसका क्या मतलब है
सोनपेठ नागरी सहकारी बैंक के जमाकर्ताओं और कर्ज़दारों के लिए, जुलाई 2025 से बैंक पर लागू शर्तें कम से कम तीन महीने और जारी रहेंगी। विज्ञप्ति में इन शर्तों का ब्योरा नहीं है, इसलिए ग्राहक बैंक की शाखाओं में लगे निर्देश की शर्तें देखें या सीधे बैंक से पूछें कि वे अपने खातों के साथ क्या कर सकते हैं और क्या नहीं।
ये निर्देश समीक्षा के अधीन हैं, यानी RBI इन्हें 30 जनवरी 2027 से पहले भी बदल सकता है। बैंक की सेवा से जुड़ी किसी समस्या पर ग्राहक RBI के पास https://cms.rbi.org.in पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
स्रोत: RBI press release
यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।
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