कानूनी

पंजाब उपभोक्ता आयोग ने LIC को हत्या के शिकार पॉलिसीधारक का दुर्घटना लाभ देने को कहा

पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कहा कि LIC ने हत्या के शिकार पॉलिसीधारक की चार पॉलिसियों पर डबल एक्सीडेंट बेनिफिट गलत तरीके से रोका, और इसे 6% ब्याज के साथ देने का आदेश दिया।

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आधिकारिक स्रोतConsumer commission
कानूनी / 22 अक्टूबर 2026

पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को मोगा में हत्या के शिकार हुए एक पॉलिसीधारक की चार पॉलिसियों पर डबल एक्सीडेंट बेनिफिट देने का आदेश दिया है। 13 अक्टूबर 2026 के फैसले में आयोग ने कहा कि LIC का इनकार सेवा में कमी है। आयोग ने 6% ब्याज और 50,000 रुपये खर्च 60 दिनों के भीतर देने का आदेश दिया।

क्या हुआ

पॉलिसीधारक के पास LIC की चार पॉलिसियां थीं, जिनमें डबल एक्सीडेंट बेनिफिट था, यानी दुर्घटना में मौत होने पर अतिरिक्त भुगतान। आदेश के अनुसार, 14 जुलाई 2020 को मोगा में उनकी दुकान पर अज्ञात लोगों ने उनकी हत्या कर दी। LIC ने मूल मृत्यु लाभ तो दे दिया, लेकिन अप्रैल 2021 में अतिरिक्त लाभ देने से इनकार कर दिया।

आदेश के अनुसार, LIC का कहना था कि सोशल मीडिया सामग्री और पुलिस की क्लोज़र रिपोर्ट से पता चलता है कि हत्या एक गिरोह ने दहशत फैलाने के लिए पहले से योजना बनाकर की थी, इसलिए यह दुर्घटना से हुई मौत नहीं थी। परिवार ने बाकी लाभ के रूप में 26,60,000 रुपये मांगे थे। मोगा के जिला आयोग ने उनकी शिकायत खारिज कर दी, जिसके बाद उन्होंने अपील की।

राज्य आयोग ने कहा कि पुलिस रिकॉर्ड गिरोह के दहशत फैलाने के इरादे की ओर इशारा करता है, और LIC यह नहीं दिखा सका कि घटना में पॉलिसीधारक की कोई भूमिका थी। आयोग ने कहा कि LIC जिस सोशल मीडिया पोस्ट पर निर्भर था, वह साबित नहीं हुई और कानून की नज़र में उसका कोई साक्ष्य मूल्य नहीं है। आयोग ने कहा कि पहले से योजना बनाकर किया गया अपराध अपने आप मौत को पॉलिसी के दायरे से बाहर नहीं कर देता, खासकर जब LIC ने कोई अपवाद शर्त रिकॉर्ड पर नहीं रखी। आयोग ने LIC के अपने 2007 के सर्कुलर का भी ज़िक्र किया, जिसमें कहा गया है कि अगर पॉलिसीधारक की हत्या हुई हो और पुलिस रिकॉर्ड में दावेदार पर कोई संदेह न हो, तो दुर्घटना लाभ का दावा नहीं रोका जाना चाहिए।

आयोग ने LIC को चारों पॉलिसियों पर डबल एक्सीडेंट बेनिफिट, 30 अप्रैल 2021 से 6% सालाना ब्याज के साथ, परिवार के तीन सदस्यों को बराबर हिस्सों में देने और साथ में 50,000 रुपये देने का निर्देश दिया।

इसका क्या मतलब है

जिन परिवारों का दुर्घटना लाभ का दावा इसलिए ठुकराया गया कि मौत हत्या थी, वे इस तर्क का हवाला दे सकते हैं: इस आदेश के अनुसार, बीमा कंपनी को दिखाना होगा कि मौत पॉलिसी की शर्तों से बाहर है। यह आयोग का निष्कर्ष है और इसके खिलाफ अपील की जा सकती है। बीमा से जुड़ी शिकायत के लिए उपभोक्ता राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 पर संपर्क कर सकते हैं या e-Daakhil पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

स्रोत: Consumer commission order

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।