कानूनी
NCLT ने Auro Gold के लिक्विडेटर को बोलीदाताओं के 42.81 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया
NCLT मुंबई ने Auro Gold Jewellery की नीलामी में असफल रहे दो बोलीदाताओं की 42,80,680 रुपये की बयाना राशि जब्त करने का लिक्विडेटर का फैसला रद्द किया और 15 दिन में रकम लौटाने का आदेश दिया।
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), मुंबई बेंच-I ने Auro Gold Jewellery Private Limited के लिक्विडेटर को लिक्विडेशन नीलामी में असफल रहे दो बोलीदाताओं को 42,80,680 रुपये (लगभग 42.81 लाख रुपये) की बयाना राशि लौटाने का आदेश दिया है। 28 अक्टूबर 2026 को सुनाए गए आदेश में ट्रिब्यूनल ने लिक्विडेटर द्वारा यह राशि जब्त करने का फैसला रद्द कर दिया और उसे लौटाने के लिए 15 दिन का समय दिया।
क्या हुआ
Auro Gold Jewellery, State Bank of India द्वारा दायर दिवाला मामले में लिक्विडेशन में है। आदेश के अनुसार, दोनों बोलीदाताओं ने 24 अप्रैल 2024 को हुई ई-नीलामी में हिस्सा लेने के लिए यह राशि, जिसे बयाना राशि (earnest money) कहते हैं, जमा की थी और वे बोली नहीं जीत पाए। नीलामी के प्रोसेस मेमोरेंडम के तहत असफल बोलीदाता की बयाना राशि लौटाई जानी होती है।
इसके बजाय लिक्विडेटर ने 13 मई 2024 के पत्र से पूरी राशि जब्त कर ली। बोलीदाता नीलाम हो रही संपत्ति में किरायेदार के रूप में रह रहे थे, और लिक्विडेटर ने यह राशि किराये के दावे में समायोजित कर दी, क्योंकि उनके अनुसार बोलीदाताओं ने कंपनी के पूर्व प्रबंधन को दिए गए किराये का ब्योरा नहीं दिया था।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि प्रोसेस मेमोरेंडम केवल खास स्थितियों में जब्ती की अनुमति देता है, जैसे जीतने वाले बोलीदाता द्वारा शर्तें तोड़ना या गलत घोषणा, और इनमें से कोई स्थिति लागू नहीं थी। उसने कहा कि लिक्विडेशन नियमों के तहत लिक्विडेटर केवल तय हो चुके कर्ज के बदले ही समायोजन कर सकता है, और ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं था कि बोलीदाताओं ने किराया नहीं दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि लिक्विडेटर ने जिन पुराने आदेशों का सहारा लिया, उनसे बोलीदाताओं पर किराया चुकाने की देनदारी तय नहीं हुई थी। लिक्विडेटर उनके खिलाफ कानून के तहत दूसरी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।
इसका क्या मतलब है
दिवाला मामलों में लिक्विडेटर द्वारा बेची जाने वाली संपत्तियों के लिए बोली लगाने वाले लोग पहले बयाना राशि जमा करते हैं। आदेश के अनुसार लिक्विडेटर को असफल बोलीदाता की राशि नीलामी की शर्तों के मुताबिक लौटानी होगी, और वह किसी ऐसे अलग दावे के लिए उसे नहीं रख सकता, जिसका फैसला नहीं हुआ है। इस आदेश के खिलाफ NCLAT में अपील की जा सकती है।
स्रोत: NCLT order
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