कंपनी मामले
NCLT दिल्ली ने 2.01 करोड़ रुपये के बकाये पर H C Jain Pipes को दिवाला प्रक्रिया में भेजा
NCLT की नई दिल्ली पीठ ने एक पाइप आपूर्तिकर्ता की याचिका पर H C Jain Pipes Private Limited को दिवाला प्रक्रिया में भेज दिया है और पहले से विवाद होने का कंपनी का दावा खारिज कर दिया है।
राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) की नई दिल्ली पीठ ने H C Jain Pipes Private Limited के खिलाफ कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है। यह वह औपचारिक प्रक्रिया है जिसमें लेनदार डिफॉल्ट करने वाली कंपनी को बचाने या उसका समाधान निकालने की कोशिश करते हैं। 31 अक्टूबर 2026 को सुनाया गया यह आदेश OFB Tech Limited की याचिका पर आया, जिसने कहा कि उसे सप्लाई किए गए पाइपों के 2,01,26,299.48 रुपये मिलने बाकी हैं।
क्या हुआ
OFB Tech एक परिचालन लेनदार है, यानी ऐसा आपूर्तिकर्ता जिसे सामान के पैसे मिलने हैं। उसने कहा कि यह बकाया 5 जून 2024 से 8 जून 2024 के बीच जारी दस बिलों से बना है। उसने 28 अगस्त 2025 को वैधानिक मांग नोटिस भेजा। उसने कहा कि मूल रकम 1,63,50,249.69 रुपये ही रही और उसके नोटिसों में अंतर सिर्फ ब्याज का था।
H C Jain Pipes ने दावे को चुनौती दी। उसने कहा कि आपूर्तिकर्ता ने पहले के एक खरीद आदेश को पूरा नहीं किया, ज्यादा दाम लिए और खराब सामान दिया, और उसने एक पुलिस शिकायत और मध्यस्थता आवेदन का सहारा लिया। न्यायाधिकरण ने कहा कि मांग नोटिस से पहले के किसी सबूत से ये आरोप साबित नहीं होते, कंपनी ऑर्डर देती रही और भुगतान करती रही, और पुलिस शिकायत व मध्यस्थता आवेदन बाद में आए। उसने पहले से विवाद होने की दलील खारिज कर दी।
कंपनी ने 4 जून 2026 का एक समझौता भी पेश किया, जिसमें 1,62,42,058 रुपये को 18,04,673 रुपये की नौ किस्तों में देय बताया गया है, और 4,50,000 रुपये के भुगतान की रसीद भी। न्यायाधिकरण ने कहा कि रिकॉर्ड से यह साबित नहीं होता कि समझौते की पूरी रकम चुका दी गई या रसीद पर दस्तखत करने वाला अधिकृत था, और यह समझौता याचिका दायर होने के समय मौजूद डिफॉल्ट को खत्म नहीं करता।
इसका क्या मतलब है
न्यायाधिकरण द्वारा नियुक्त अंतरिम समाधान पेशेवर अब कंपनी का कामकाज संभालेगा। प्रक्रिया के दौरान मोरेटोरियम लागू रहेगा, जिससे कंपनी के खिलाफ मुकदमे, वसूली, सुरक्षा हित लागू करने और उसकी संपत्ति बेचने पर रोक रहेगी। आपूर्तिकर्ता को शुरुआती खर्च के लिए अंतरिम समाधान पेशेवर के पास 2 लाख रुपये जमा करने होंगे। आदेश में लेनदारों के दावे दाखिल करने की कोई तारीख नहीं दी गई है।
दिवाला प्रक्रिया में भेजा जाना धोखाधड़ी या कुप्रबंधन का निष्कर्ष नहीं है। NCLT के आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) में अपील की जा सकती है।
स्रोत: NCLT order
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