कानूनी
NCLAT ने Worlds Window Exim का परिसमापन बरकरार रखा, 7 करोड़ रुपये की योजना खारिज
NCLAT ने Worlds Window Exim की 7 करोड़ रुपये की समाधान योजना खारिज करने और कंपनी के परिसमापन व जाँच के NCLT के आदेश को बरकरार रखा।
राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने 12 अक्टूबर 2026 को Worlds Window Exim Private Limited के परिसमापन (liquidation) का आदेश बरकरार रखा। इससे पहले 7 करोड़ रुपये की एक समाधान योजना खारिज कर दी गई थी, जो कंपनी के लगभग 9.42 करोड़ रुपये के परिसमापन मूल्य से कम थी। न्यायाधिकरण ने दो अपीलें खारिज कीं, एक सफल बोलीदाता की और दूसरी Prudent ARC Limited की, जिसके पास लेनदारों के 94.86% वोट थे। उसने कंपनी के मामलों की जाँच के निर्देश को भी सही ठहराया।
क्या हुआ
फ़ैसले के अनुसार, Central Bank of India ने इस कंपनी के ख़िलाफ़ दिवाला याचिका दायर की थी। यह एक एसेट-होल्डिंग कंपनी है, जिसका कोई कामकाज नहीं था और जिसके पास उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद ज़िले में ज़मीन के टुकड़े थे। मामला 16 मई 2025 को स्वीकार हुआ। प्रक्रिया के दौरान Bank of India, Bank of Baroda और Central Bank of India के कर्ज़ Prudent ARC को सौंप दिए गए, जो एक एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी है। इससे लेनदारों की समिति में उसका वोट 94.86% हो गया। बाकी 5.14% Punjab National Bank के पास था।
समिति ने Dickey Special Situation Investment Trust-DSSF Series 2 की 7 करोड़ रुपये की योजना मंज़ूर की। 14 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) की नई दिल्ली पीठ ने इसे खारिज कर परिसमापन का आदेश दिया, यानी कंपनी की संपत्तियाँ बेचकर लेनदारों का कर्ज़ चुकाया जाएगा।
NCLAT ने कहा कि परिसमापन मूल्य से कम भुगतान वाली योजना अपने आप में गैरकानूनी नहीं है। लेकिन उसने माना कि यह योजना यह नहीं दिखाती कि वह डिफ़ॉल्ट के कारण को कैसे दूर करेगी, जो एक अनिवार्य शर्त है, इसलिए यह Code की कसौटी पर विफल रही। NCLAT ने कहा कि प्रक्रिया के दौरान सरकारी बैंकों के कर्ज़ के हस्तांतरण समेत पूरी परिस्थितियाँ योजना पर NCLT के संदेह का समर्थन करती हैं। उसने Insolvency and Bankruptcy Code की धारा 43, 45, 50 और 66 के तहत लिक्विडेटर की जाँच को बरकरार रखा, और कहा कि किसी के ख़िलाफ़ आदेश से पहले संबंधित लोगों की सुनवाई होगी।
इसका क्या मतलब है
NCLAT ने NCLT का वह निर्देश रद्द कर दिया, जिसमें एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी का हिस्सा उतनी रकम तक सीमित किया गया था जितनी उसने Central Bank of India को चुकाई थी। उसने कहा कि जाँच पूरी होने तक यह निर्देश समय से पहले है, और इस मुद्दे पर सभी पक्षों की दलीलें खुली रखीं।
इस फ़ैसले से पता चलता है कि ज़्यादातर लेनदारों के समर्थन वाली समाधान योजना भी अनिवार्य शर्तें पूरी न करने पर खारिज हो सकती है। NCLAT के आदेश के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है।
स्रोत: NCLAT order
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