कानूनी
NCLAT ने Polycab India के खिलाफ दिवाला आदेश रद्द किया, कंपनी CIRP से बाहर
NCLAT ने 30 अक्टूबर 2026 को NCLT अहमदाबाद का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें 2.78 करोड़ रुपये के एक सप्लायर के दावे पर Polycab India को दिवाला प्रक्रिया में डाला गया था। ट्रिब्यूनल ने माना कि विवाद पहले से मौजूद था।
राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने 30 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) की अहमदाबाद बेंच का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें Polycab India Limited को कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) में भर्ती किया गया था। अपीलीय न्यायाधिकरण ने माना कि 2.78 करोड़ रुपये के जिस ऑपरेशनल कर्ज का दावा किया गया था, उस पर सप्लायर के डिमांड नोटिस से पहले ही असली विवाद मौजूद था, और कंपनी को तुरंत प्रभाव से दिवाला प्रक्रिया से मुक्त कर दिया।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार, Polycab India को एल्युमिनियम इनगॉट सप्लाई करने वाली Asier Metals Private Limited ने 2.78 करोड़ रुपये के बकाया ऑपरेशनल कर्ज का दावा किया था। ऑपरेशनल क्रेडिटर वह सप्लायर होता है जो सामान या सेवा देने के बदले पैसा बकाया होने का दावा करता है। Asier Metals ने 6 अगस्त 2026 को डिमांड नोटिस भेजा और 24 अगस्त 2026 को दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) की Section 9 के तहत याचिका दायर की। NCLT ने 7 अक्टूबर 2026 को याचिका स्वीकार कर ली।
Polycab India के एक निलंबित निदेशक ने अपील की। NCLAT ने डिमांड नोटिस से पहले के ईमेल और WhatsApp संदेशों की जांच की, जिनमें 22 जुलाई 2026 का एक ईमेल भी था। इसमें Polycab India ने रकम पर आपत्ति जताई थी और 80 लाख रुपये के डिटेंशन और डेमरेज क्रेडिट नोट की मांग की थी। ट्रिब्यूनल ने पाया कि सप्लायर ने Polycab India को भरोसा दिया था कि इन शुल्कों को सुलझाकर समायोजित किया जाएगा, और माना कि खातों के मिलान, क्रेडिट नोट और अंतिम देय रकम को लेकर वास्तव में विवाद था।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय कसौटियों को लागू करते हुए NCLAT ने कहा कि NCLT ने इस पत्राचार का विश्लेषण किए बिना उसे खारिज कर दिया था, और उसके आदेश में "स्पष्ट खामी" थी। ट्रिब्यूनल ने कहा कि IBC की Section 9(5)(ii)(d) के तहत ऐसा विवाद मौजूद होने पर याचिका खारिज की जानी चाहिए।
इसका क्या मतलब है
NCLAT ने दिवाला प्रक्रिया शुरू करने का आदेश और उसके तहत पारित सभी आदेश रद्द कर दिए। Polycab India दिवाला प्रक्रिया से मुक्त हो गई है और तुरंत प्रभाव से अपने निदेशक मंडल के जरिए काम कर सकती है। कोई खर्च नहीं लगाया गया।
कंपनी के शेयरधारकों, कर्मचारियों और सप्लायरों के लिए यह फैसला 7 अक्टूबर 2026 को शुरू हुई दिवाला प्रक्रिया को खत्म करता है। ट्रिब्यूनल ने यह तय नहीं किया कि सप्लायर का पैसा बकाया है या नहीं; उसने केवल यह माना कि एक ठोस विवाद मौजूद था जिसका फैसला कहीं और होना चाहिए। NCLAT के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है।
स्रोत: NCLAT order
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