कानूनी

दिल की बीमारी छिपाने पर Tata AIG Life का मृत्यु दावा खारिज करना NCDRC ने सही माना

NCDRC ने माना कि पॉलिसीधारक ने प्रस्ताव फ़ॉर्म में दिल के पुराने इलाज की जानकारी नहीं दी, और Tata AIG Life को 4.4 लाख रुपये देने के आदेश रद्द कर दिए।

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आधिकारिक स्रोतConsumer commission
कानूनी / 22 अक्टूबर 2026

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने 12 अक्टूबर 2026 को एक मृत्यु दावे में Tata AIG Life Insurance Co. Ltd. के पक्ष में फ़ैसला दिया। आयोग ने माना कि पॉलिसीधारक ने प्रस्ताव फ़ॉर्म में दिल की गंभीर बीमारी की जानकारी नहीं दी थी। आयोग ने ज़िला फ़ोरम और राजस्थान राज्य आयोग के वे आदेश रद्द कर दिए, जिनमें बीमा कंपनी को परिवार को ब्याज समेत 4.4 लाख रुपये देने को कहा गया था।

क्या हुआ

आदेश के अनुसार, पॉलिसीधारक ने 30 सितंबर 2011 को प्रस्ताव फ़ॉर्म भरा था और 5 अप्रैल 2012 को जयपुर के एक अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई। परिवार ने दावा किया, लेकिन बीमा कंपनी ने यह कहते हुए केवल 92,297 रुपये की यूनिट वैल्यू पूर्ण और अंतिम निपटान के रूप में दी कि पॉलिसीधारक ने अपनी सेहत का इतिहास छिपाया था। परिवार ने 9.4 लाख रुपये के पूरे लाभ की माँग की।

श्रीगंगानगर के ज़िला फ़ोरम ने बीमा कंपनी को 9% साधारण ब्याज के साथ 4.4 लाख रुपये, मृत्यु लाभ और मुकदमे के खर्च के रूप में 5,000 रुपये देने का आदेश दिया। राज्य आयोग ने अक्टूबर 2017 में बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी।

NCDRC ने कहा कि अस्पताल के डेथ समरी में, जिसकी प्रामाणिकता पर कोई विवाद नहीं था, दर्ज था कि पॉलिसीधारक दिल के पुराने मरीज़ थे और 2008 में, यानी प्रस्ताव से लगभग तीन साल पहले, उनकी कार्डियक रीसिंक्रोनाइज़ेशन थेरेपी (दिल की एक प्रक्रिया) हो चुकी थी। उन्होंने फ़ॉर्म में सेहत से जुड़े विशेष सवालों के जवाब "नहीं" में दिए थे। आयोग ने कहा कि दोनों निचले फ़ोरम ने इस प्रविष्टि पर विचार नहीं किया, और परिवार इसे ग़लत साबित करने का कोई सबूत पेश नहीं कर सका।

इसका क्या मतलब है

NCDRC ने कहा कि बीमा परम सद्भाव (utmost good faith) का अनुबंध है, इसलिए खरीदार को प्रस्ताव फ़ॉर्म में सेहत से जुड़े हर विशेष सवाल का पूरा और सच्चा जवाब देना होता है। आयोग ने कहा कि जानकारी छिपाने को साबित करने की ज़िम्मेदारी बीमा कंपनी की है, लेकिन पहले के इलाज को दिखाने वाला निर्विवाद अस्पताल रिकॉर्ड, बीमारी शुरू होने की सही तारीख़ के सबूत के बिना भी, यह ज़िम्मेदारी पूरी कर सकता है। जानकारी न देना अहम था, इसलिए आयोग ने माना कि बीमा कंपनी का दावा खारिज करना सेवा में कमी नहीं थी और शिकायत खारिज कर दी। कोई खर्च नहीं लगाया गया।

पॉलिसीधारकों के लिए यह फ़ैसला बताता है कि प्रस्ताव फ़ॉर्म में पूछे जाने पर पहले के इलाज की जानकारी देनी ज़रूरी है। NCDRC के इस आदेश के ख़िलाफ़ अपील की जा सकती है।

स्रोत: Consumer commission order

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।