कानूनी
NCDRC ने GDA के खिलाफ प्लॉट आदेश रद्द किया, कहा जालसाजी विवाद सिविल कोर्ट तय करे
NCDRC ने Ghaziabad Development Authority को प्लॉट सौंपने के आदेश रद्द कर दिए और कहा कि कथित जालसाजी और मालिकाना हक का विवाद सिविल कोर्ट में तय होगा।
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने 12 अक्टूबर 2026 को निचले दो उपभोक्ता आयोगों के वे आदेश रद्द कर दिए, जिनमें Ghaziabad Development Authority (GDA) को गाजियाबाद के कौशांबी में एक आवासीय प्लॉट सौंपने को कहा गया था। आयोग ने कहा कि जो विवाद कथित जालसाजी और संपत्ति के मालिकाना हक पर टिका हो, उसे उपभोक्ता आयोग नहीं, सिविल कोर्ट तय करेगा। शिकायत खारिज कर दी गई, साथ ही सक्षम सिविल कोर्ट जाने की छूट दी गई।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार, 1980 के दशक के अंत में एक मूल आवंटी को कौशांबी में GDA का प्लॉट आवंटित हुआ था। 1997 में GDA ने उन पत्रों और हलफनामों के आधार पर, जिन्हें वह मूल आवंटी द्वारा हस्ताक्षरित बताता है, प्लॉट की रजिस्टर्ड सेल डीड एक सह-आवेदक के नाम कर दी। मूल आवंटी के वारिसों का आरोप था कि ये दस्तावेज जाली थे, और उन्होंने उपभोक्ता शिकायत के जरिए प्लॉट मांगा।
2019 में गाजियाबाद के जिला आयोग ने GDA को वारिसों के नाम सेल डीड करने या पास में उतने ही आकार का प्लॉट देने, और 50,000 रुपये मुआवजा तथा 5,000 रुपये खर्च देने का आदेश दिया। 2023 में उत्तर प्रदेश राज्य आयोग ने मुआवजा हटा दिया, पर प्लॉट वाला निर्देश बरकरार रखा।
NCDRC ने कहा कि इस मामले में जालसाजी, विवादित हस्ताक्षर और मालिकाना हक को लेकर "तथ्यों के गंभीर विवाद" हैं। आयोग ने कहा कि सेल डीड जिसके नाम है, वह शिकायत में पक्षकार नहीं था, और हस्तलेख विशेषज्ञ की रिपोर्ट फोटोकॉपी पर आधारित थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि उपभोक्ता आयोग संक्षिप्त सुनवाई में मामले तय करते हैं और ऐसे सवालों पर फैसला नहीं दे सकते। आयोग ने स्पष्ट किया कि उसने दस्तावेजों के असली होने या सेल डीड की वैधता पर कोई राय नहीं दी है।
इसका क्या मतलब है
उपभोक्ता आयोग सेवा में कमी, जैसे कब्जे में देरी या रिफंड, की शिकायतों के लिए तेज और सस्ता रास्ता हैं। यह आदेश उनकी सीमा दिखाता है: जहां दावा जालसाजी साबित करने या किसी और के नाम दर्ज रजिस्टर्ड सेल डीड रद्द करवाने पर निर्भर हो, वहां आयोग फैसला करने से मना कर पक्षों को सिविल कोर्ट भेज सकता है। इस आदेश के खिलाफ अपील की जा सकती है। बिल्डर या प्राधिकरण के खिलाफ सामान्य सेवा शिकायतों के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) और e-Daakhil पोर्टल ही आधिकारिक माध्यम हैं।
स्रोत: Consumer commission order
यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।