कानूनी
NCDRC ने United India Insurance को 14.4 लाख रुपये का मनी-इन-ट्रांजिट क्लेम चुकाने को कहा
राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने कहा कि United India Insurance ने गुजरात के एक मनी चेंजर का 2007 में रास्ते में गायब हुई विदेशी मुद्रा का क्लेम गलत तरीके से ठुकराया।

फ़ोटो: Sun Insurance Office (Life time: c. 1912) / Wikimedia Commons, public domain (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने 30 अक्टूबर 2026 को कहा कि United India Insurance ने गुजरात के विदेशी मुद्रा कारोबार Anand Money Changers का मनी इंश्योरेंस क्लेम गलत तरीके से ठुकराया था। यह क्लेम 2007 में रास्ते में गायब हुई विदेशी मुद्रा का था। आयोग ने बीमा कंपनी को 14,40,186 रुपये, शिकायत दर्ज होने की तारीख से 7.5% सालाना साधारण ब्याज के साथ, चुकाने का आदेश दिया।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार, कंपनी के पास 14 दिसंबर 2006 से 13 दिसंबर 2007 तक 70 लाख रुपये के बीमा राशि वाली मनी इंश्योरेंस पॉलिसी थी। इसमें आणंद, नडियाद और बोरसद के दफ्तरों में रखी नकदी और विदेशी मुद्रा तथा शाखाओं से आणंद दफ्तर तक ले जाई जा रही रकम कवर थी। 5 फरवरी 2007 को एक कर्मचारी बोरसद शाखा से विदेशी मुद्रा एक बंद बैग में आणंद दफ्तर ले गया, और वहां पहुंचने पर मुद्रा गायब मिली। कंपनी ने कर्मचारी के खिलाफ पुलिस शिकायत की, पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की, और कंपनी ने 15,75,000 रुपये का क्लेम किया।
बीमा कंपनी ने 19 अगस्त 2008 को यह आरोप लगाते हुए क्लेम ठुकरा दिया कि अहम जानकारी छिपाई गई और क्लेम धोखाधड़ी वाला है। आणंद के एक जिला आयोग ने 2014 में शिकायत मंजूर की, लेकिन गुजरात राज्य आयोग ने जनवरी 2022 में वह आदेश पलट दिया।
राष्ट्रीय आयोग ने कहा कि संदेहास्पद परिस्थितियों के बावजूद बीमा कंपनी के पास क्लेम ठुकराने का कोई ठोस सबूत नहीं था। आयोग ने कहा कि पॉलिसी साफ तौर पर उस नुकसान को कवर करती है जो नकदी ले जा रहे कर्मचारी की धोखाधड़ी या बेईमानी से रास्ते में हो और 48 घंटे के भीतर पता चले। आयोग ने कहा कि पुलिस को कुछ तथ्य न बताना अपने आप में क्लेम ठुकराने का आधार नहीं हो सकता, क्योंकि पॉलिसी की शर्त सर्वेयर या बीमा कंपनी को जानकारी देने से जुड़ी है। चूंकि कर्मचारी के पुलिस बयान में गायब मुद्रा का मूल्य 14,40,186 रुपये बताया गया था, आयोग ने देय रकम 15,75,000 रुपये से घटा दी।
कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक मामला अलग है: चार्जशीट एक आरोप है, दोषसिद्धि नहीं, और अदालत में दोष साबित होने तक आरोपी निर्दोष माना जाता है।
इसका क्या मतलब है
रास्ते में नकदी का बीमा कराने वाले कारोबारों के लिए, आयोग ने ले जाने वाले कर्मचारी की बेईमानी के कवर को पॉलिसी के बीमित जोखिम का हिस्सा माना और कहा कि क्लेम ठुकराने का आधार बीमा कंपनी को साबित करना होगा। आयोग ने राज्य आयोग का आदेश रद्द किया और घटी हुई रकम के साथ जिला आयोग का आदेश बहाल किया। इस आदेश के खिलाफ अपील की जा सकती है। बीमा क्लेम के विवाद में उपभोक्ता राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) से मदद ले सकते हैं या e-Daakhil पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
स्रोत: Consumer commission order
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