कानूनी
NCDRC का आदेश: National Insurance आग के क्लेम के 31.85 लाख रुपये 9% ब्याज सहित चुकाए
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने आग के क्लेम को वर्षों तक लटकाए रखने पर National Insurance Company को सेवा में कमी का दोषी माना और ब्याज सहित भुगतान का आदेश दिया।
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने National Insurance Company को बिहार के बेगूसराय की एक खुदरा फर्म को 31.85 लाख रुपये चुकाने का आदेश दिया है, जिसकी दुकान मार्च 2013 में आग में नष्ट हो गई थी। 22 अक्टूबर 2026 को सुनाए गए आदेश में आयोग ने बीमा कंपनी को सेवा में कमी का दोषी माना और 25 अक्टूबर 2013 से 9% सालाना साधारण ब्याज भी जोड़ा।
क्या हुआ
यह फर्म स्पोर्ट्सवियर की एक फ्रैंचाइज़ी दुकान चलाती थी, जिसका बीमा Vyapar Suraksha पॉलिसी के तहत था। 22-23 मार्च 2013 की रात आग ने दुकान को खाक कर दिया और फर्म ने अगले ही दिन इसकी सूचना दी। सर्वेयर (बीमा नुकसान का आकलन करने वाला विशेषज्ञ) ने 25 सितंबर 2013 को अपनी अंतिम रिपोर्ट दे दी।
आदेश के अनुसार, बीमा कंपनी ने लगभग तीन साल तक न तो भुगतान किया और न ही क्लेम खारिज करने का कोई कारण बताया। उसने फिर से ऐसे दस्तावेज़ मांगे जो आयोग के अनुसार सर्वेयर के पास पहले से थे, 2016 में बिना कोई कारण दर्ज किए एक जांचकर्ता नियुक्त किया और सितंबर 2016 में फाइल को "No Claim" बताकर बंद कर दिया। आयोग ने कहा कि हस्ताक्षर के लिए डिस्चार्ज वाउचर भेजना भुगतान नहीं है, और ग्राहक के "फुल एंड फाइनल" सेटलमेंट से असहमत होने पर बीमा कंपनी स्वीकार की गई राशि नहीं रोक सकती।
आयोग ने बीमा नियामक के पॉलिसीधारक नियमों का हवाला दिया, जिनके तहत सर्वे रिपोर्ट मिलने के 30 दिन के भीतर बीमा कंपनी को सेटलमेंट की पेशकश करनी होती है या कारण बताकर क्लेम खारिज करना होता है। आयोग ने नुकसान के लिए सर्वेयर का आकलन स्वीकार किया। कारोबारी नुकसान के 49 लाख रुपये का दावा खारिज कर दिया गया, क्योंकि पॉलिसी में बिज़नेस इंटरप्शन कवर शामिल नहीं था।
इसका क्या मतलब है
बीमा कंपनी को 45 दिन के भीतर 31.85 लाख रुपये, 25 अक्टूबर 2013 से भुगतान तक 9% साधारण ब्याज और 50,000 रुपये मुकदमे का खर्च चुकाना होगा। समय सीमा चूकने पर पूरी बकाया राशि पर 12% सालाना ब्याज लगेगा। इस आदेश के खिलाफ अपील की जा सकती है।
पॉलिसीधारकों के लिए यह फैसला बताता है कि सर्वे रिपोर्ट के बाद क्लेम को अनिश्चित काल तक लटकाया नहीं जा सकता, और सेटलमेंट पर विवाद होने से बीमा कंपनी खुद मानी गई राशि का भुगतान टाल नहीं सकती। क्लेम अटकने पर उपभोक्ता National Consumer Helpline (1915) से मदद ले सकते हैं या e-Daakhil पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
स्रोत: Consumer commission order
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