कानूनी
MP उपभोक्ता आयोग ने ट्रक जब्ती मामले में Tata Motors पर मुआवजा घटाकर 50,000 रुपये किया
मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता आयोग ने कहा कि Tata Motors की फाइनेंस शाखा ने कर्जदार का ट्रक वैध रूप से जब्त किया, लेकिन बिक्री की सही प्रक्रिया साबित न करने पर उसे 50,000 रुपये देने होंगे।
मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने 30 अक्टूबर 2026 को कहा कि Tata Motors के फाइनेंस डिवीजन को किस्तें न चुकाने पर कर्जदार का ट्रक वापस लेने का अधिकार था, लेकिन उसे मुआवजा देना होगा क्योंकि वह यह साबित नहीं कर सका कि ट्रक सही प्रक्रिया से बेचा गया। आयोग ने भोपाल जिला आयोग द्वारा तय 1,50,000 रुपये का मुआवजा घटाकर 50,000 रुपये कर दिया।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार, कर्जदार ने फरवरी 2008 में Tata Motors के फाइनेंस डिवीजन से 11 लाख रुपये का कर्ज लेकर 10 पहियों वाला ट्रक खरीदा था, जिसे 27,300 रुपये की 56 किस्तों में चुकाना था। उसका कहना था कि जून 2011 तक वह 8,46,929 रुपये जमा कर चुका था, तभी कंपनी ने ट्रक जब्त कर लिया। कंपनी ने कहा कि उसने 31 अगस्त 2011 को ट्रक 6,70,000 रुपये में बेचा और 2,18,016.56 रुपये अब भी बकाया हैं।
आयोग ने माना कि कर्जदार उपभोक्ता है, क्योंकि उसने स्वरोजगार से रोजी-रोटी कमाने के लिए ट्रक खरीदा था और कंपनी किसी व्यावसायिक कारोबार का सबूत नहीं दे सकी। आयोग ने Supreme Court के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि हाइपोथिकेशन समझौते, यानी वह कर्ज अनुबंध जिसमें वाहन कर्जदाता के पास गिरवी रहता है, के तहत चूक होने पर कंपनी ट्रक वापस ले सकती थी। रिकॉर्ड से पता चला कि जब्ती से पहले पुलिस को सूचना दी गई थी और नोटिस भेजे गए थे। लेकिन आयोग ने पाया कि कंपनी ने बिक्री कैसे की, जैसे सार्वजनिक सूचना या टेंडर, इसका कोई सबूत नहीं दिया, इसलिए उसे मुआवजा देना होगा।
आयोग ने जिला आयोग का वह निर्देश भी रद्द कर दिया जिसमें कंपनी को कोई बकाया वसूल न करने को कहा गया था, क्योंकि कर्ज समझौता कंपनी को यह अधिकार देता है। खर्च से जुड़ा जिला आयोग का निर्देश बना रहेगा।
इसका क्या मतलब है
वाहन कर्जदारों के लिए यह आदेश बताता है कि किस्तें न चुकाने पर कर्जदाता वाहन वापस ले सकता है, लेकिन उसे यह दिखाना होगा कि उसने वाहन सही प्रक्रिया से बेचा, वरना उसे मुआवजा देना पड़ सकता है। चूक करने वाले कर्जदार से कर्ज की बाकी रकम फिर भी मांगी जा सकती है। आयोग के आदेश के खिलाफ अपील की जा सकती है। कर्जदाता के खिलाफ शिकायत National Consumer Helpline (1915) या e-Daakhil के जरिए की जा सकती है।
स्रोत: Consumer commission order
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