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कानूनी

किस्तें न चुकाने वाले कर्जदार की दोबारा याचिका केरल हाई कोर्ट ने खारिज की

केरल हाई कोर्ट ने 5 नवंबर 2026 को कहा कि अदालत से मिली किस्तें न चुकाने वाला कर्जदार बैंक के खिलाफ वही राहत दोबारा नहीं मांग सकता।

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आधिकारिक स्रोतKerala High Court
Steps in the case against Ponnani Co-operative Urban Bank: instalments allowed on 5 June 2025, not paid, a fresh petition filed, and the petition dismissed on 5 November 2026 as an abuse of process.
ओक्विलिया ग्राफ़िक। स्रोत: Kerala High Court judgment, 5 November 2026

केरल हाई कोर्ट ने 5 नवंबर 2026 को पोन्नानी को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक की SARFAESI Act के तहत वसूली कार्रवाई के खिलाफ एक कर्जदार की दूसरी रिट याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि जो कर्जदार पहले अदालत से मिली किस्तों की सुविधा का पालन नहीं करता, वह वही राहत दोबारा नहीं मांग सकता। अदालत ने ऐसी दोबारा दायर याचिका को अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया।

क्या हुआ

फैसले के अनुसार, कर्जदार पहले भी बैंक की SARFAESI Act के तहत वसूली कार्यवाही के खिलाफ हाई कोर्ट गई थीं। यह कानून बैंकों को कर्ज के बदले गिरवी संपत्ति कब्जे में लेकर बेचने का अधिकार देता है। उस मामले में अदालत ने 5 जून 2025 को याचिका का निपटारा करते हुए उन्हें समय दिया और बकाया किस्तों में चुकाने की अनुमति दी।

अदालत ने दर्ज किया कि उन्होंने निर्देश के मुताबिक किस्तें नहीं चुकाईं और इसके बाद बैंक ने वसूली जारी रखी। उन्होंने उसी कार्यवाही के बाद के कदमों के खिलाफ नई याचिका दायर की और फिर से किस्तों में भुगतान की अनुमति मांगी। उनका तर्क था कि नई याचिका बाद की कार्रवाई से जुड़ी है, इसलिए इस पर सुनवाई हो सकती है।

अदालत ने कहा कि res judicata का सिद्धांत, जो एक ही विवाद पर दोबारा बहस करने से रोकता है, रिट याचिकाओं पर भी लागू होता है। अदालत ने कहा कि जो पक्ष उन्हीं पक्षों के बीच और उसी कर्ज पर पहले की रिट याचिका में तय शर्तों का पालन नहीं करता, वह उसी कार्यवाही के बाद के चरण में वही निर्देश नहीं मांग सकता। अदालत के अनुसार, पहला फैसला अंतिम हो जाने पर पक्ष और अदालत दोनों उससे बंधे होते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार रिट क्षेत्राधिकार में SARFAESI कार्यवाही में हाई कोर्ट के दखल की गुंजाइश बहुत सीमित है।

इसका क्या मतलब है

SARFAESI Act के तहत वसूली का सामना कर रहे कर्जदारों के लिए यह फैसला याद दिलाता है कि अदालत से मिली किस्तों की योजना का पालन करना जरूरी है। किस्तें चूकने पर उसी कर्ज के लिए नई रिट याचिका दायर करके दूसरा मौका मिलना मुश्किल हो सकता है, और बैंक वसूली जारी रख सकता है। बैंक की सेवा से जुड़ी शिकायत RBI के पोर्टल https://cms.rbi.org.in पर की जा सकती है।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।