कानूनी
केरल हाई कोर्ट ने विजिलेंस मामले में KSEB के वरिष्ठ सहायक के. बिमल को आरोपमुक्त करने से इनकार किया
केरल हाई कोर्ट ने 24 अक्टूबर 2026 को बोर्ड के धन के दुरुपयोग के अभियोजन के आरोपों का सामना कर रहे KSEB के एक वरिष्ठ सहायक को आरोपमुक्त करने से इनकार किया और अभियोजन की मंज़ूरी को सही ठहराया।
2001 और 2002 में केरल राज्य बिजली बोर्ड (KSEB) के इलेक्ट्रिकल सेक्शन, चोवारा में वरिष्ठ सहायक रहे के. बिमल को बोर्ड के धन के कथित दुरुपयोग से जुड़े दो विजिलेंस मामलों में मुकदमे का सामना करना होगा। केरल हाई कोर्ट ने 24 अक्टूबर 2026 को उन्हें आरोपमुक्त करने से इनकार कर दिया और कहा कि KSEB के मुख्य अभियंता (HRM) द्वारा दी गई अभियोजन की मंज़ूरी वैध है।
क्या हुआ
फ़ैसले में दर्ज अभियोजन पक्ष के अनुसार, सेक्शन के तत्कालीन कैशियर और वरिष्ठ सहायक ने 2001 और 2002 में साज़िश करके KSEB के धन का दुरुपयोग किया। अभियोजन का आरोप है कि वरिष्ठ सहायक का हिस्सा 2001 में 15,983 रुपये और 2002 में 35,457 रुपये था, और कैशियर का 75,411 रुपये और 98,432 रुपये। आरोप भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की Section 13(1)(c) और 13(1)(d) सहपठित 13(2), और भारतीय दंड संहिता की Section 477A, 465, 409, 201 और 120B के तहत हैं।
जांच आयुक्त और विशेष न्यायाधीश (विजिलेंस), मुवाट्टुपुझा ने 31 मार्च 2026 को उनकी आरोपमुक्ति याचिकाएं ख़ारिज कर दी थीं। हाई कोर्ट में उन्होंने दलील दी कि उनकी नियुक्ति करने वाला बोर्ड ही अभियोजन की मंज़ूरी दे सकता था, और वरिष्ठ सहायक की भूमिका केवल निगरानी की थी।
हाई कोर्ट ने दोनों दलीलें ठुकरा दीं। अदालत ने कहा कि अधिनियम की Section 19(1)(c) के तहत मंज़ूरी उसी प्राधिकारी से आनी चाहिए जो कर्मचारी को पद से हटा सकता है, और KSEB के 2022 के शक्तियों के प्रत्यायोजन के तहत सहायक कार्यकारी अभियंता तक के कैडर के लिए मुख्य अभियंता (HRM) अनुशासनात्मक प्राधिकारी हैं। गुण-दोष पर अदालत ने निचली अदालत की यह राय बरकरार रखी कि वरिष्ठ सहायक डुप्लिकेट बिलों से उपभोक्ता खाता बही तैयार करते थे, उन्हें दैनिक मांग विवरण से तुलना कर कम वसूली पकड़नी चाहिए थी, और उस बही में झूठी प्रविष्टियां पाई गईं।
ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष साबित होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
इसका क्या मतलब है
इस फ़ैसले से स्पष्ट होता है कि इन कैडर के KSEB कर्मचारी पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने के लिए मुख्य अभियंता (HRM) की मंज़ूरी पर्याप्त है। अदालत ने दोनों पुनरीक्षण याचिकाएं ख़ारिज कीं, कोई भी अंतरिम रोक हटा दी, और निर्देश दिया कि आदेश की प्रति विशेष अदालत को भेजी जाए ताकि मुकदमा जल्दी चले।
किसी अधिकारी द्वारा रिश्वत मांगे जाने पर कोई भी व्यक्ति अपने राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को इसकी शिकायत कर सकता है; हर राज्य की हेल्पलाइन की Oquilia की गाइड https://www.oquilia.com/report-a-bribe पर है।
स्रोत: High Court judgment
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