कानूनी

गुजरात हाई कोर्ट ने SBI के पास गिरवी जमीन पर 2.40 करोड़ रुपये का टैक्स चार्ज रद्द किया

गुजरात हाई कोर्ट ने SBI के पास गिरवी जमीन पर दर्ज राज्य का टैक्स चार्ज रद्द किया और माना कि SARFAESI Act के तहत सुरक्षित कर्जदाता के रूप में इस संपत्ति पर पहला अधिकार बैंक का है।

Oquilia Newsroom2 मिनट में पढ़ेंRead in English
आधिकारिक स्रोतGujarat High Court
कानूनी / 19 अक्टूबर 2026

गुजरात हाई कोर्ट ने 9 अक्टूबर 2026 को State Bank of India के पास गिरवी रखी जमीन पर State Tax Officer द्वारा दर्ज 2.40 करोड़ रुपये का टैक्स चार्ज रद्द कर दिया और घोषित किया कि इस संपत्ति पर पहला अधिकार बैंक का है। कोर्ट ने माना कि SARFAESI Act, 2002 की Section 26E के तहत सुरक्षित कर्जदाता के रूप में बैंक का दावा राज्य के टैक्स दावे से पहले आता है।

क्या हुआ

फैसले के अनुसार, SBI ने एक कर्जदार कंपनी को कुल 25 करोड़ रुपये के कैश क्रेडिट और टर्म लोन दिए थे। इनके बदले अहमदाबाद जिले के साणंद तालुका के मौजे रूपावटी में औद्योगिक जमीन का रजिस्टर्ड मॉर्गेज रखा गया था। बैंक ने 29 जनवरी 2023 को खाते को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट, यानी ऐसा कर्ज जिसकी अदायगी रुक गई हो, घोषित किया। इसके बाद उसने SARFAESI Act के तहत 25,91,11,085 रुपये का नोटिस भेजा और 24 अप्रैल 2023 को जमीन पर कब्जा ले लिया।

जब बैंक जमीन की सार्वजनिक नीलामी की तैयारी कर रहा था, तब उसे पता चला कि 20 अप्रैल 2026 को State Tax Officer के आवेदन पर भूमि रिकॉर्ड में 2,39,93,020 रुपये का चार्ज दर्ज किया गया है। इस एंट्री में कर्जदार कंपनी पर CGST/GGST Act, 2017 के तहत बकाया बताई गई मांग दर्ज थी। बैंक ने 17 अगस्त 2026 को अधिकारी को पत्र लिखकर चार्ज हटाने को कहा, लेकिन कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार कोई जवाब नहीं मिला।

बैंक और राज्य, दोनों के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि यह मुद्दा इसी हाई कोर्ट के एक पुराने फैसले में तय हो चुका है, जिसमें कहा गया था कि Section 26E के तहत सुरक्षित संपत्ति पर बैंक की पहली प्राथमिकता राज्य के दावे पर भारी है। उसी फैसले के आधार पर कोर्ट ने भूमि रिकॉर्ड की एंट्री रद्द कर दी और घोषित किया कि गिरवी संपत्तियों पर पहला अधिकार SBI का है।

इसका क्या मतलब है

बैंक ने कोर्ट को बताया था कि वह जमीन को सार्वजनिक नीलामी में बेचकर खरीदार को साफ और बिक्री योग्य मालिकाना हक देना चाहता है। एंट्री रद्द होने के बाद इन दो सर्वे नंबरों के रिकॉर्ड पर राज्य का टैक्स चार्ज अब नहीं रहेगा।

यह फैसला इस सिद्धांत को लागू करता है कि रजिस्टर्ड मॉर्गेज रखने वाले सुरक्षित कर्जदाता का दावा उसी संपत्ति पर राज्य के टैक्स दावे से पहले आता है।

स्रोत: High Court judgment

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