कानूनी

गुजरात हाई कोर्ट ने Bank of Baroda को 49 लाख रुपये हेजिंग चार्ज लौटाने का आदेश दिया

गुजरात हाई कोर्ट ने माना कि 110% नकद मार्जिन देने वाले ग्राहक से Bank of Baroda 49.24 लाख रुपये हेजिंग चार्ज नहीं काट सकता था, और 8% ब्याज के साथ रकम लौटाने का आदेश दिया।

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आधिकारिक स्रोतGujarat High Court
कानूनी / 19 अक्टूबर 2026

गुजरात हाई कोर्ट ने 9 अक्टूबर 2026 को Bank of Baroda को आदेश दिया कि वह Man-Made Textile Research Association के खाते से हेजिंग चार्ज के रूप में काटे गए 49,24,068 रुपये लौटाए। यह संस्था कपड़ा उद्योग के लिए शोध करने वाली सोसाइटी और ट्रस्ट है। खंडपीठ ने माना कि बैंक ये चार्ज वसूल नहीं कर सकता था, क्योंकि ग्राहक ने इस आधार पर 110% नकद मार्जिन दिया था कि कोई फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट बुक नहीं किया जाएगा। बैंक को रकम काटने की तारीख से लौटाने की तारीख तक 8% ब्याज भी देना होगा।

क्या हुआ

फैसले के अनुसार, संस्था ने 2011 और 2012 में जर्मनी, कोरिया और चीन से मशीनें आयात कीं और इसके लिए Bank of Baroda से तीन लाइन ऑफ क्रेडिट लीं। बैंक की मंजूरी की शर्तों में फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में 100% नकद मार्जिन रखना था, और फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट बुक न करने पर 10% अतिरिक्त मार्जिन। फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट भविष्य की विनिमय दर पहले से तय कर देता है, ताकि मुद्रा के उतार-चढ़ाव से बचाव हो। कोर्ट ने दर्ज किया कि यह बात स्वीकार की गई थी कि संस्था ने 110% मार्जिन रखा और बैंक से फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट बुक न करने को कहा।

अप्रैल और मई 2014 में क्रेडिट लाइनें बंद होने पर बैंक ने 49,24,068 रुपये हेजिंग चार्ज के रूप में काट लिए। बैंक की दलील थी कि RBI के निर्देशों के तहत रोलओवर पर हेजिंग जरूरी थी और संस्था के सलाहकार ने इसकी सहमति दी थी। कोर्ट ने कहा कि बैंक जिन RBI सर्कुलरों पर भरोसा कर रहा था, वे बिना हेज वाले विदेशी मुद्रा जोखिम से जुड़े थे, जबकि यहां जोखिम बिना हेज का नहीं था क्योंकि बैंक के पास पहले से 110% मार्जिन था। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैंक के पास हेजिंग के लिए कोई लिखित सहमति नहीं थी। कोर्ट ने बैंक की यह आपत्ति भी खारिज कर दी कि अनुबंध से जुड़ा विवाद रिट याचिका में नहीं सुना जा सकता, क्योंकि तथ्य स्वीकार किए जा चुके थे।

इसका क्या मतलब है

कोर्ट ने माना कि स्वीकार किए गए तथ्यों के आधार पर बैंक उस हेजिंग का चार्ज नहीं वसूल सकता था, जिसे ग्राहक ने मंजूरी की शर्तों के तहत मना कर दिया था। कोर्ट का तर्क लिखित मंजूरी पत्र, ग्राहक के नवीनीकरण पत्रों और ग्राहक की किसी लिखित सहमति के न होने पर आधारित था।

जिन ग्राहकों को लगता है कि बैंक ने बिना उनकी सहमति के चार्ज काटे हैं, वे पहले बैंक से शिकायत कर सकते हैं और समाधान न होने पर RBI के शिकायत पोर्टल https://cms.rbi.org.in पर जा सकते हैं।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।