कानूनी

गुजरात उपभोक्ता आयोग ने Oriental Insurance को मेडिक्लेम के 26,085 रुपये चुकाने का आदेश दिया

गुजरात राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कहा कि Oriental Insurance ने एक पॉलिसीधारक का दावा कम बीमा राशि पर गलत तरीके से निपटाया, और 9% ब्याज के साथ 26,085 रुपये देने का आदेश दिया।

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आधिकारिक स्रोतConsumer commission
कानूनी / 23 अक्टूबर 2026

गुजरात राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने The Oriental Insurance Company Ltd को एक पॉलिसीधारक को मेडिक्लेम दावे के 26,085 रुपये 9% ब्याज के साथ चुकाने का आदेश दिया है। 12 अक्टूबर 2026 को सुनाए गए आदेश में आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी ने दावे को कम बीमा राशि पर निपटाकर गलती की। आयोग ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम, नवसारी का वह पुराना आदेश रद्द कर दिया, जिसमें शिकायत खारिज कर दी गई थी।

क्या हुआ

आदेश के अनुसार, पॉलिसीधारक और उनका परिवार 2001 से लगातार इसी बीमा कंपनी से मेडिक्लेम पॉलिसी ले रहा था। 7 जनवरी 2017 से 6 जनवरी 2018 की पॉलिसी में बीमा राशि 2 लाख रुपये थी। इसी अवधि में पॉलिसीधारक की पत्नी को बवासीर (पाइल्स) के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, और बिल 30,005 रुपये का बना।

बीमा कंपनी ने पूरा दावा नहीं चुकाया। आदेश के मुताबिक, कंपनी की गणना शीट में लिखा था कि इस बीमारी पर दो साल का एक्सक्लूज़न लागू है, इसलिए दावा 2015 की 1 लाख रुपये की बीमा राशि के हिसाब से देय है। पॉलिसीधारक ने कंपनी का भेजा वाउचर स्वीकार नहीं किया और शिकायत दर्ज की, जिसे जिला फोरम ने मई 2018 में खारिज कर दिया।

अपील पर आयोग ने कहा कि परिवार 2001 से बीमित था, इसलिए दो साल का एक्सक्लूज़न लागू नहीं होता और दावा 2 लाख रुपये की बीमा राशि पर निपटाया जाना चाहिए। आयोग ने यह भी कहा कि बीमा कंपनी ने कटौतियों के लिए इस्तेमाल पॉलिसी शर्तें पेश नहीं कीं। आयोग ने 10% को-पेमेंट की कटौती और गैर-चिकित्सा मदों के 920 रुपये की कटौती सही मानी, जिसके बाद रकम 26,085 रुपये बनी। आयोग ने 2,000 रुपये मुकदमे के खर्च और 2,000 रुपये मानसिक पीड़ा के लिए भी देने का आदेश दिया। ब्याज शिकायत दर्ज होने की तारीख से भुगतान होने तक लगेगा।

इसका क्या मतलब है

पॉलिसीधारकों के लिए यह आदेश बताता है कि इस आयोग की राय में, किसी खास बीमारी की प्रतीक्षा अवधि (ऐसा एक्सक्लूज़न जो बीमा के शुरुआती वर्षों में ही लागू होता है) उस परिवार पर लागू नहीं की जा सकती जिसने बिना रुकावट पॉलिसी का नवीनीकरण कराया हो। यह भी साफ होता है कि बीमा कंपनी से हर कटौती के पीछे की पॉलिसी शर्त बताने की अपेक्षा की जाती है।

यह आदेश आयोग का निष्कर्ष है और इसके खिलाफ अपील की जा सकती है। जिस पॉलिसीधारक का दावा काटा गया हो, वह नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (1915) से संपर्क कर सकता है या e-Daakhil के जरिए शिकायत दर्ज कर सकता है।

स्रोत: Consumer commission order

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।