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गुवाहाटी हाई कोर्ट: कर्ज वसूली कानून के तहत बैंक की कार्रवाई पर दीवानी अदालत रोक नहीं लगा सकती

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने 6 नवंबर 2026 को कहा कि दीवानी अदालतें बैंक की वसूली पर रोक नहीं लगा सकतीं, भले ही संपत्ति कर्जदार ने कभी गिरवी न रखी हो।

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आधिकारिक स्रोतGauhati High Court
Timeline of the Punjab National Bank recovery case: loan declared a non-performing asset on 30 November 2018, banner on a second plot in August 2022, injunction refused on 5 May 2026, appeal dismissed on 6 November 2026.
ओक्विलिया ग्राफ़िक। स्रोत: Gauhati High Court judgment, 6 November 2026

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने 6 नवंबर 2026 को कहा कि कर्ज वसूली कानून के तहत बैंक की वसूली कार्रवाई पर दीवानी अदालत रोक नहीं लगा सकती, भले ही वह कर्जदार की ऐसी संपत्ति हो जो कभी बैंक के पास गिरवी नहीं रखी गई। अदालत ने पंजाब नेशनल बैंक के खिलाफ एक कर्जदार की अपील खारिज कर दी, जिस पर करीब 1.61 करोड़ रुपये की वसूली लंबित है।

क्या हुआ

फैसले के अनुसार, कर्जदार ने असम के कछार जिले का एक प्लॉट पंजाब नेशनल बैंक से कर्ज लेने के लिए गिरवी रखा था। बैंक ने 30 नवंबर 2018 को कर्ज को एनपीए घोषित किया और SARFAESI Act के तहत वसूली शुरू की। यह कानून बैंकों को गिरवी संपत्ति कब्जे में लेकर बेचने का अधिकार देता है। अगस्त 2022 में बैंक ने एक दूसरे प्लॉट पर बैनर लगा दिया, जिसके बारे में कर्जदार का कहना था कि उसने उसे अलग से खरीदा था और कभी गिरवी नहीं रखा।

कर्जदार ने दीवानी मुकदमा दायर कर उस प्लॉट पर बैंक को रोकने के लिए अस्थायी निषेधाज्ञा मांगी। निचली अदालत ने 5 मई 2026 को यह मांग ठुकरा दी। बैंक ने हाई कोर्ट को बताया कि ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT), गुवाहाटी के वसूली अधिकारी के सामने 1,61,45,292.54 रुपये की वसूली की कार्यवाही लंबित है, जिस पर 10.50% सालाना ब्याज भी लग रहा है।

अदालत ने कहा कि Recovery of Debts Due to Banks and Financial Institutions Act, 1993 की धारा 25(aa) वसूली अधिकारी को गिरवी संपत्ति के साथ-साथ कर्जदार की किसी अन्य संपत्ति को भी कब्जे में लेकर बेचने का अधिकार देती है। अदालत ने कहा कि SARFAESI Act की धारा 34 दीवानी अदालतों को ऐसी कार्रवाई पर रोक लगाने से मना करती है। अदालत ने यह भी कहा कि निष्पक्षता का तकाजा है कि वसूली अधिकारी पहले गिरवी संपत्ति बेचकर बकाया वसूलने की कोशिश करे और रकम बाकी रहने पर ही दूसरी संपत्ति की ओर जाए।

इसका क्या मतलब है

डिफॉल्ट करने वाले कर्जदारों के लिए इसका मतलब है कि इन कानूनों के तहत बैंक की वसूली रोकने के लिए दीवानी अदालत सही जगह नहीं है, भले ही संपत्ति गिरवी न रखी गई हो। अदालत ने कर्जदार को छूट दी कि वह अपनी गैर-गिरवी संपत्ति पर वसूली अधिकारी के अधिकार के निष्पक्ष इस्तेमाल के लिए DRT, गुवाहाटी जा सकता है। दोनों पक्षों को अपना खर्च खुद उठाने को कहा गया। बैंक की सेवा से जुड़ी शिकायत RBI के पोर्टल https://cms.rbi.org.in पर की जा सकती है।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।