कार्रवाई

कथित विदेशी फंड मामले में ED ने FEMA के तहत Reliance Power की 2,032.81 करोड़ की संपत्ति ज़ब्त की

ED ने Reliance Power की 2,032.81 करोड़ रुपये की संपत्तियां ज़ब्त की हैं, जिनमें बैंक बैलेंस और Sasan Power की हिस्सेदारी शामिल है। ED का आरोप है कि FEMA का उल्लंघन कर विदेशी मुद्रा बाहर रखी गई।

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आधिकारिक स्रोतEnforcement Directorate
कार्रवाई / 16 अक्टूबर 2026

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 की Section 37A के तहत Reliance Power Ltd (RPL) की भारत में मौजूद 2,032.81 करोड़ रुपये की संपत्तियां ज़ब्त की हैं। ED ने 14 अक्टूबर 2026 को बताया कि ज़ब्त संपत्तियों में RPL के बैंक बैलेंस और Sasan Power Limited में उसकी हिस्सेदारी शामिल है। ED के अनुसार, यह राशि उस विदेशी मुद्रा के बराबर है जिसके बारे में उसका आरोप है कि वह FEMA की Section 4 का उल्लंघन करके भारत के बाहर रखी गई है।

क्या हुआ

ED ने कहा कि उसकी जांच भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से मिली जानकारी पर शुरू हुई, जो RPL के खातों में 2,101.46 करोड़ रुपये के राइट-ऑफ और प्रावधानों से जुड़ी थी। राइट-ऑफ का मतलब है कि कंपनी अपने खातों में दर्ज करती है कि लगाया गया या उधार दिया गया पैसा शायद वापस नहीं आएगा। ये ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (BVI) और केमैन आइलैंड्स की कंपनियों में विदेशी निवेश और अग्रिम से जुड़े थे।

ED ने 6 से 8 मार्च 2026 तक FEMA के तहत तलाशी ली। ED के अनुसार, Reliance Natural Resources Ltd ने, जिसका बाद में RPL में विलय हो गया, 2006 में विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड से 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर (US$ 300 million) जुटाए और उसमें से US$ 275 million अपनी सिंगापुर सहायक कंपनी में लगाए। ED ने कहा कि इस सहायक कंपनी ने यह पैसा Deutsche Bank (Suisse) SA, जिनेवा में जमा किया, और इन जमाओं को BVI की संस्थाओं को दिए गए कर्ज़ के लिए गिरवी के रूप में इस्तेमाल किया गया।

ED का आरोप है कि ये BVI संस्थाएं कंपनी के प्रमोटर समूह द्वारा मुखौटा व्यक्तियों के ज़रिए भारत से नियंत्रित की जाती थीं। एजेंसी का आरोप है कि कर्ज़ का पैसा मॉरीशस स्थित संस्थाओं के ज़रिए भारत में अस्थायी राउंड-ट्रिपिंग समेत कई कामों में इस्तेमाल हुआ और समूह के फायदे के लिए भारत के बाहर रखा गया।

ED के अनुसार, BVI संस्थाओं ने कर्ज़ नहीं चुकाया। ED का आरोप है कि इसके बाद दस्तावेज़ गढ़े गए और पिछली तारीख में तैयार किए गए, ताकि दिखाया जा सके कि सिंगापुर सहायक कंपनी और RPL की इंडोनेशियाई सहायक कंपनियों ने वास्तविक कारोबारी उद्देश्य से BVI संस्थाओं को अग्रिम दिए थे।

ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष साबित होने तक आरोपियों को निर्दोष माना जाता है, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

इसका क्या मतलब है

RPL के शेयरधारकों के लिए, ED के अनुसार यह ज़ब्ती कंपनी के बैंक बैलेंस और Sasan Power Limited में उसकी हिस्सेदारी पर लागू होती है। यह मामला उन राइट-ऑफ से जुड़ा है जिनकी ओर SEBI ने ध्यान दिलाया था, और ED की जांच अभी जारी है।

स्रोत: Enforcement Directorate press release

यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।

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