कार्रवाई

'डिजिटल अरेस्ट' साइबर ठगी के 2.95 करोड़ रुपये के मामले में ED ने अभियोजन शिकायत दाखिल की

ED के अहमदाबाद कार्यालय ने अभियोजन शिकायत दाखिल की है। ED का आरोप है कि 'डिजिटल अरेस्ट' के जरिए दो बुजुर्गों से लिए गए 2.95 करोड़ रुपये म्यूल खातों से घुमाए गए।

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आधिकारिक स्रोतEnforcement Directorate
कार्रवाई / 22 अक्टूबर 2026

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 16 अक्टूबर 2026 की एक विज्ञप्ति में बताया कि उसने 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर ठगी के एक मामले में अहमदाबाद की विशेष PMLA अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की है। ED के अनुसार दो बुजुर्ग पीड़ितों से CBI और पुलिस अधिकारी बनकर फोन करने वालों ने 1.15 करोड़ रुपये और 1.80 करोड़ रुपये, यानी कुल 2.95 करोड़ रुपये ले लिए। अभियोजन शिकायत, धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत ED की चार्जशीट जैसी होती है।

क्या हुआ

ED ने कहा कि उसकी जांच अहमदाबाद और मुंबई की साइबर क्राइम पुलिस की कई FIR के आधार पर शुरू हुई। ED के मुताबिक पीड़ितों को झूठी गिरफ्तारी की धमकी देकर M/s Quality Fruit Traders और M/s Shivam Charitable Trust के बैंक खातों में पैसा भेजने को मजबूर किया गया। एजेंसी इन्हें म्यूल खाते बताती है।

ED का आरोप है कि यह पैसा तुरंत 50 से ज्यादा म्यूल खातों से घुमाया गया और भारत व दुबई में अलग-अलग जगहों पर छोटी-छोटी रकम में नकद निकाला गया। ED ने कहा कि ये खाते I4C पोर्टल पर दर्ज 396 लंबित साइबर अपराध शिकायतों से जुड़े हैं। ED के अनुसार नकदी को अंगड़िया (अनौपचारिक कूरियर) चैनलों से भी भेजा गया और इससे क्रिप्टोकरेंसी खरीदी गई।

एजेंसी का यह भी आरोप है कि 30 लाख रुपये एक ऐसे क्रेडिट कार्ड में भेजे गए जो एक व्यक्ति के नाम पर जारी था पर कोई दूसरा उसे चला रहा था, और इस रकम से तीसरे पक्ष की बीमा पॉलिसियों के प्रीमियम भरे गए। ED ने कहा कि वह आरोपियों का सूरत में करीब 30 लाख रुपये का एक फ्लैट और 8 लाख रुपये की तीन फिक्स्ड डिपॉजिट पहले ही कुर्क कर चुका है। उसने कहा कि आगे की जांच जारी है।

ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष साबित होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

इसका क्या मतलब है

यह मामला 'डिजिटल अरेस्ट' कॉल का वही तरीका दिखाता है जो ED ने बताया है: फोन करने वाले खुद को अधिकारी बताते हैं, गिरफ्तारी की धमकी देते हैं और तुरंत पैसा भेजने का दबाव डालते हैं।

अगर आपको ऐसी कॉल आए या आप पैसा गंवा चुके हों, तो तुरंत https://cybercrime.gov.in पर या हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।

स्रोत: Enforcement Directorate press release

यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।

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