कार्रवाई

ADCL की 14.95 करोड़ रुपये की FD के कथित हेरफेर पर ED ने दाखिल की नई PMLA शिकायत

ED ने बेंगलुरु में पांच आरोपियों के खिलाफ पूरक शिकायत दाखिल की है, जिसमें आरोप है कि फर्ज़ी खाते और जाली कागज़ों से ADCL की 14.95 करोड़ रुपये की FD निकाली गई।

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आधिकारिक स्रोतEnforcement Directorate
कार्रवाई / 16 अक्टूबर 2026

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने Dr. B.R. Ambedkar Development Corporation Ltd. (ADCL) की लगभग 14.95 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉज़िट राशि के कथित हेरफेर के मामले में पांच आरोपियों के खिलाफ बेंगलुरु की विशेष PMLA अदालत में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की है। यह शिकायत 5 अक्टूबर 2026 को दाखिल की गई और ED ने 14 अक्टूबर 2026 को इसकी जानकारी दी।

क्या हुआ

ED का मनी लॉन्ड्रिंग मामला बेंगलुरु में CBI की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा द्वारा भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दर्ज FIR पर आधारित है, जो PMLA के तहत अनुसूचित अपराध हैं।

ED के अनुसार, State Bank of Mysore की बेंगलुरु स्थित HAL II Stage शाखा में जाली दस्तावेज़ों और प्रतिरूपण के ज़रिए ADCL के नाम पर एक फर्ज़ी चालू खाता खोला गया। ED का आरोप है कि इसके बाद ADCL की 5-5 करोड़ रुपये की चार फिक्स्ड डिपॉज़िट जाली जमा रसीदों और गढ़े हुए प्री-क्लोज़र पत्रों के ज़रिए समय से पहले बंद कराई गईं, जिससे लगभग 14.95 करोड़ रुपये निकाल लिए गए।

ED का आरोप है कि इस पैसे को कई व्यक्तियों और संस्थाओं के बैंक खातों से घुमाया गया और फिर ट्रांसफर व नकद निकासी की गई, ताकि उसका स्रोत छिपाया जा सके। इसे लेयरिंग कहा जाता है। एजेंसी ने कहा कि PMLA की Section 50 के तहत दर्ज बयानों से पता चला कि यह पैसा जानबूझकर लिया, भेजा और निकाला गया।

इससे पहले, 25 मार्च 2026 को ED ने 15 आरोपी व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल कर लगभग 6.02 करोड़ रुपये की संपत्तियां ज़ब्त करने की मांग की थी। 22 जुलाई 2026 को उसने एक आरोपी की 24 लाख रुपये की संपत्ति के लिए दूसरा अस्थायी कुर्की आदेश जारी किया। अस्थायी कुर्की की पुष्टि PMLA के तहत न्यायनिर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating Authority) को करनी होती है। ED ने कहा कि आगे की जांच जारी है।

ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष साबित होने तक आरोपियों को निर्दोष माना जाता है, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

इसका क्या मतलब है

ED के विवरण के अनुसार, इस मामले में जाली रसीदों और पत्रों के ज़रिए फिक्स्ड डिपॉज़िट समय से पहले बंद कराकर पैसा एक फर्ज़ी खाते में ले जाया गया। विशेष अदालत अब पहली शिकायत के साथ इस पूरक शिकायत की भी जांच करेगी, और संपत्तियों की ज़ब्ती अदालत के फैसले पर निर्भर करेगी।

स्रोत: Enforcement Directorate press release

यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।

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