कार्रवाई
New India Co-operative Bank में 122 करोड़ रुपये के कथित गबन पर ED ने दाखिल की PMLA शिकायत
ED ने मुंबई की विशेष PMLA अदालत में आठ आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है, जिसमें New India Co-operative Bank से लगभग 122 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने New India Co-operative Bank Limited (NICBL) से लगभग 122 करोड़ रुपये के कथित गबन के मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ मुंबई की विशेष PMLA अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की है। अदालत ने आरोपियों को प्री-कॉग्निजेंस नोटिस जारी करने का आदेश दिया है, यानी मामले पर औपचारिक संज्ञान लेने से पहले उन्हें सुनवाई का मौका मिलेगा।
क्या हुआ
ED ने मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की थी। ED के अनुसार, बैंक के एक पूर्व जनरल मैनेजर और अकाउंट्स प्रमुख ने अकाउंटिंग सिस्टम में हेरफेर करके और शाखाओं के बीच नकद ट्रांसफर के झूठे रिकॉर्ड बनाकर बैंक का पैसा निकालने में अहम भूमिका निभाई। ED का कहना है कि इस व्यक्ति ने लंबे समय तक पैसा निकालने की बात स्वीकार की।
ED का आरोप है कि ये गतिविधियां एक अन्य आरोपी के कहने पर भी हुईं, जिन्हें बैंक का पूर्व चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन बताया गया है और जिनका कई वर्षों तक बैंक के कामकाज पर नियंत्रण रहा। ED के मुताबिक, कथित अपराध की कमाई में से लगभग 26 से 30 करोड़ रुपये उस समय के पूर्व या कार्यवाहक चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन को गए।
ED ने यह भी आरोप लगाया है कि एक तीसरे आरोपी ने NICBL के कुछ कर्ज़दारों की मिलीभगत से भारत के बाहर एक कारोबार बिना भुगतान के हासिल किया, और उन कर्ज़दारों के ज़रिए विदेशी कंपनियों के खातों में पैसा मंगाने की व्यवस्था की, जिन्हें बैंक ने बड़े कर्ज़ दिए थे।
इससे पहले ED ने जमा राशि, फ्लैट और ज़मीन समेत 33 संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की थीं, जिनकी कीमत लगभग 16.95 करोड़ रुपये है। PMLA के तहत न्यायनिर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating Authority) ने इस कुर्की की पुष्टि कर दी है। EOW पहले ही आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। ED ने कहा कि आरोपी फिलहाल भारत से बाहर हैं और जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष साबित होने तक आरोपियों को निर्दोष माना जाता है, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
इसका क्या मतलब है
NICBL के जमाकर्ताओं के लिए, मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला अब विशेष अदालत के सामने है। ED ने कहा कि वह बैंक से निकाले गए पैसे का पता लगा रहा है, जिससे उसके अनुसार बैंक और उसके जमाकर्ताओं के साथ धोखाधड़ी हुई। लगभग 16.95 करोड़ रुपये की संपत्तियां पुष्ट कुर्की के तहत हैं।
यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।
इस रिपोर्ट में आपका नाम है, या कोई गलती दिखी? सुधार और जवाब के लिए लिखें: editor@oquilia.com