कार्रवाई

कथित प्लॉट खरीदार मामले में ED ने Ocean Seven Buildtech की 136.42 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की

ED ने Ocean Seven Buildtech, उसके प्रमोटर और एक परिजन की 136.42 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की है। ED का आरोप है कि राजस्थान की परियोजनाओं में प्लॉट खरीदारों का पैसा दूसरी जगह लगाया गया।

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आधिकारिक स्रोतEnforcement Directorate
कार्रवाई / 16 अक्टूबर 2026

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने Ocean Seven Buildtech Pvt Ltd (OSBPL) के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में करीब 136.42 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। एजेंसी ने 14 अक्टूबर 2026 को इसकी जानकारी दी। ED के अनुसार, इसके साथ इस मामले में कुर्क की गई संपत्तियां बढ़कर करीब 188 करोड़ रुपये हो गई हैं।

क्या हुआ

ED के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों में जयपुर ज़िले के गांव बिलोंची और राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ में ज़मीन के टुकड़े, गुरुग्राम के सेक्टर 102 में एक आवासीय प्लॉट और कंपनी, उसके प्रमोटर और एक परिजन के पांच बैंक खातों में जमा 69.06 लाख रुपये शामिल हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है। अस्थायी कुर्की से फिलहाल संपत्तियों को बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता, और इसकी पुष्टि PMLA के न्यायनिर्णायक प्राधिकरण को करनी होगी।

ED ने कहा कि उसकी जांच दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा, हरियाणा पुलिस और राजस्थान पुलिस द्वारा दर्ज FIR पर आधारित है, जिनमें कंपनी की रियल एस्टेट परियोजनाओं में धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाज़ी और आपराधिक साज़िश का आरोप है। ED ने इससे पहले 5 जनवरी 2026 को करीब 51.57 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की थी और 9 जनवरी 2026 को नई दिल्ली की विशेष PMLA अदालत में अभियोजन शिकायत दायर की थी।

ED का आरोप है कि OSBPL ने दिसंबर 2006 से मार्च 2015 के बीच राजस्थान की चार परियोजनाओं (Amber Garden, Kot Residency, Kot Farms और Kot Industrial Estate) में प्लॉट खरीदारों से 118 करोड़ रुपये से ज़्यादा जुटाए। ED के अनुसार, जयपुर विकास प्राधिकरण और राजस्व अधिकारियों के निरीक्षण में पाया गया कि परियोजनाएं कभी विकसित नहीं हुईं, और पूरा भुगतान करने वाले खरीदारों को कभी कब्ज़ा नहीं मिला। एजेंसी का आरोप है कि यह पैसा दूसरे कामों में लगाया गया, जिसमें गुरुग्राम में दफ्तर खरीदना भी शामिल है, और FIR दर्ज होने के बाद करीब 39 एकड़ ज़मीन सहयोगियों और अन्य लोगों के नाम कर दी गई।

ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; आरोपी तब तक निर्दोष माने जाते हैं जब तक अदालत में उनका दोष साबित न हो, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

इसका क्या मतलब है

इन परियोजनाओं के खरीदारों के लिए इसका मतलब है कि मामला चलने तक और न्यायनिर्णायक प्राधिकरण की पुष्टि होने तक सूचीबद्ध संपत्तियां फ्रीज़ रहेंगी। रियल एस्टेट खरीद से जुड़ी शिकायत वाले खरीदार राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 पर संपर्क कर सकते हैं या e-Daakhil के ज़रिए उपभोक्ता शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

स्रोत: Enforcement Directorate press release

यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।

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