कानूनी
दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व शेयरधारकों की रिफंड राशि IEPF में भेजने की PNB की याचिका खारिज की
दिल्ली हाई कोर्ट ने 8 अक्टूबर 2026 को पंजाब नेशनल बैंक की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए कहा कि पूंजी घटाने के बाद Meena Steels Limited के पूर्व शेयरधारकों को मिलने वाला रिफंड IEPF में भेजना जरूरी नहीं है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने 8 अक्टूबर 2026 को पंजाब नेशनल बैंक की वह पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी, जो Meena Steels Limited के पूर्व शेयरधारकों को रिफंड के लिए रखी गई रकम से जुड़े विवाद में दायर की गई थी। बैंक की दलील थी कि यह रकम निवेशक शिक्षा एवं संरक्षण कोष (IEPF) में भेजी जानी चाहिए, जो Companies Act, 2013 के तहत केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया कोष है। कोर्ट ने कहा कि बैंक जिस प्रावधान का सहारा ले रहा था, वह इन रिफंड पर लागू नहीं होता।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार, Meena Steels Limited ने 6 दिसंबर 2014 के एक प्रस्ताव के जरिए अपनी शेयर पूंजी घटाई थी, जिसे कोर्ट ने 29 मार्च 2016 को मंजूरी दी थी। पूर्व शेयरधारकों को रिफंड देने के लिए 28 जून 2016 को बैंक में एक एस्क्रो खाता खोला गया था, यानी किसी तय मकसद के लिए रखा गया अलग खाता।
30 अगस्त 2022 के आदेश में कोर्ट ने कंपनी को लाभार्थियों की सूची दोबारा जमा करने और बैंक को नए रिफंड वारंट जारी करने का निर्देश दिया था। बची हुई रकम कंपनी के नाम पर एक अलग खाते में जानी थी, जिसका इस्तेमाल सिर्फ पूर्व शेयरधारकों को भुगतान के लिए होना था। 2 फरवरी 2026 को कोर्ट ने इसमें बदलाव किया कि रिफंड वारंट के बराबर की रकम भी उसी खाते में रखी जाएगी और वह भी सिर्फ पूर्व शेयरधारकों के लिए होगी।
बैंक ने पुनर्विचार की मांग करते हुए कहा कि सात साल बीत चुके हैं और Companies Act, 2013 की Section 125(2)(h) के तहत यह रकम IEPF में भेजना अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा कि Section 125(2)(h) कंपनियों को प्रतिभूतियों के आवंटन के लिए मिली उस आवेदन राशि से जुड़ी है जो लौटाई जानी है, जबकि ये रिफंड कोर्ट से मंजूर पूंजी घटाने की प्रक्रिया से पैदा हुए हैं। कोर्ट को रिकॉर्ड में कोई स्पष्ट त्रुटि नहीं दिखी और उसने पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी।
इसका क्या मतलब है
Meena Steels Limited के पूर्व शेयरधारकों के लिए कोर्ट के पहले के निर्देश बरकरार हैं। उनके लिए अलग रखी गई रकम एक अलग खाते में रहेगी और उसका इस्तेमाल सिर्फ योजना के तहत उनके प्रति कंपनी की देनदारी चुकाने के लिए होगा, किसी और काम के लिए नहीं। कंपनी के प्रबंध निदेशक को इस बारे में हलफनामे पर वचन देना था।
यह फैसला बैंक द्वारा उद्धृत IEPF प्रावधान की सीमा भी तय करता है। कोर्ट के अनुसार, Section 125(2)(h) का सात साल वाला ट्रांसफर नियम प्रतिभूतियों की आवेदन राशि से जुड़ा है, और बैंक यह नहीं दिखा सका कि शेयर पूंजी घटाने से पैदा हुए रिफंड इसके दायरे में कैसे आते हैं।
स्रोत: High Court judgment
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