कानूनी

ED के मनी-लॉन्ड्रिंग मामले में RCOM के पूर्व अधिकारी को दिल्ली हाई कोर्ट से जमानत

दिल्ली हाई कोर्ट ने 15 October 2026 को Reliance Communications के एक पूर्व एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर को उस मामले में जमानत दी, जिसमें ED बैंक लोन के डायवर्जन का आरोप लगाता है।

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आधिकारिक स्रोतDelhi High Court
कानूनी / 23 अक्टूबर 2026

दिल्ली हाई कोर्ट ने 15 October 2026 को Reliance Communications Limited (RCOM) के एक पूर्व एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मनी-लॉन्ड्रिंग मामले में नियमित जमानत दे दी। आरोपी 29 January 2026 से हिरासत में थे। कोर्ट ने 1 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानतों पर उनकी रिहाई का आदेश दिया।

क्या हुआ

फैसले के अनुसार, ED का मामला 21 August 2025 की CBI FIR से जुड़ा है, जो State Bank of India (SBI) की शिकायत पर RCOM और अन्य के खिलाफ दर्ज हुई थी और जिसमें धोखाधड़ी और लोन की रकम के डायवर्जन से SBI को 2,929.05 करोड़ रुपये के नुकसान का आरोप है। ED का आरोप है कि आरोपी ने एक याट, मैनहट्टन के एक अपार्टमेंट और अपनी बेटियों की पढ़ाई के लिए विदेश से हुए भुगतानों से जुड़े लेन-देन किए, और ED इन लेन-देन में कथित अपराध की कमाई करीब 149.77 करोड़ रुपये आंकता है।

कोर्ट ने कहा कि याट और अपार्टमेंट 2008 और 2010 में खरीदे गए थे, जबकि FIR में लगाए गए आरोप 2013-2017 के हैं। कोर्ट ने माना कि अभी उपलब्ध सामग्री के आधार पर ED पर्याप्त रूप से नहीं दिखा पाया कि ये संपत्तियां बाद के लोन से जुड़े कथित अपराधों की कमाई कैसे बनीं। कोर्ट ने आठ महीने से अधिक की हिरासत, करीब 77,384 पन्नों और 56 गवाहों तक बढ़ चुके रिकॉर्ड, और जल्द ट्रायल की कम संभावना का भी जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि उसके निष्कर्ष केवल जमानत तक सीमित हैं और लेन-देन की वैधता का फैसला नहीं करते, जो ट्रायल में तय होगी।

ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोषी साबित होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

इसका क्या मतलब है

जमानत की शर्तों के तहत आरोपी को अपना पासपोर्ट जमा करना होगा, स्पेशल कोर्ट की अनुमति के बिना वे भारत से बाहर नहीं जा सकते, गवाहों से संपर्क नहीं कर सकते, और कोर्ट की अनुमति के बिना मामले से जुड़ी संपत्तियों या उनकी बिक्री की रकम के निपटारे पर कोई निर्देश नहीं दे सकते।

कोर्ट ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों को कथित वित्तीय अनियमितताओं की व्यापक जांच तय समय में पूरी करने का निर्देश दिया है, और कहा कि जमानत से वह जांच नहीं रुकती। यह फैसला केवल यह तय करता है कि ट्रायल से पहले आरोपी हिरासत में रहेंगे या नहीं; यह आरोपों पर फैसला नहीं है।

स्रोत: High Court judgment

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