कानूनी

दिल्ली उपभोक्ता आयोग: कंपनी सह-उधारकर्ता होने पर HDFC Bank का फोरक्लोज़र चार्ज सही

दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कहा कि एक कंपनी के सह-उधारकर्ता होने के कारण HDFC Bank 4,03,434 रुपये का फोरक्लोज़र चार्ज ले सकता था, और रिफंड का आदेश रद्द कर दिया।

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आधिकारिक स्रोतConsumer commission
कानूनी / 22 अक्टूबर 2026

दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कहा है कि HDFC Bank Ltd. होम लोन जल्दी बंद करने पर 4,03,434 रुपये का चार्ज लेने का हकदार था, क्योंकि सह-उधारकर्ताओं में एक कंपनी भी शामिल थी। 13 अक्टूबर 2026 के फैसले में आयोग ने जिला आयोग का वह आदेश रद्द कर दिया जिसमें ब्याज और मुआवज़े के साथ रिफंड का निर्देश दिया गया था।

क्या हुआ

अक्टूबर 2016 में एक उधारकर्ता और उनके परिवार के दो सदस्यों ने अपना होम लोन दूसरे बैंक से HDFC Ltd., अब HDFC Bank, में ट्रांसफर कराया। 1.77 करोड़ रुपये का यह लोन 15 साल में चुकाना था। सितंबर 2017 में उधारकर्ता ने लोन जल्दी बंद करने का आवेदन किया और उनसे 4,03,434 रुपये फोरक्लोज़र चार्ज के रूप में लिए गए।

उधारकर्ता का तर्क था कि RBI के नियम व्यक्तियों को दिए गए फ्लोटिंग रेट लोन पर ऐसे चार्ज की मनाही करते हैं। मई 2024 में जिला आयोग ने यह माना कि लोन व्यक्तियों को दिया गया था, और 10% ब्याज के साथ रिफंड तथा मुआवज़े और मुकदमे के खर्च के रूप में 50,000 रुपये देने का आदेश दिया। बैंक ने अपील की। फैसले के अनुसार, अपील में उधारकर्ता ने न जवाब दाखिल किया, न लिखित दलीलें।

राज्य आयोग ने अक्टूबर 2016 के सैंक्शन लेटर, को-ऑप्शन और कन्फर्मेटरी एग्रीमेंट और प्रॉमिसरी नोट की जांच की। आयोग ने कहा कि इनसे पता चलता है कि एक प्राइवेट कंपनी सह-उधारकर्ता के रूप में शामिल थी।

इसके बाद आयोग ने नेशनल हाउसिंग बैंक के 2014 के सर्कुलरों का हवाला दिया। ये हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को व्यक्तिगत उधारकर्ताओं के फ्लोटिंग रेट टर्म लोन पर फोरक्लोज़र चार्ज लेने से रोकते हैं, लेकिन यह भी स्पष्ट करते हैं कि जिस लोन में कोई कंपनी या फर्म उधारकर्ता या सह-उधारकर्ता हो, वह इस छूट से बाहर है। आयोग ने यह भी कहा कि उधारकर्ताओं ने प्रीपेमेंट चार्ज की अनुमति देने वाली शर्तें स्वीकार की थीं। आयोग ने कहा कि सेवा में कोई कमी नहीं थी।

इसका क्या मतलब है

फ्लोटिंग रेट होम लोन पर फोरक्लोज़र चार्ज से छूट व्यक्तिगत उधारकर्ताओं के लिए है। इस फैसले के अनुसार, किसी कंपनी या फर्म को सह-उधारकर्ता बनाने से, भले ही साथ में परिवार के सदस्य हों, लोन इस सुरक्षा से बाहर हो सकता है।

लोन जल्दी चुकाने की योजना बनाने से पहले उधारकर्ता अपने सैंक्शन लेटर और लोन दस्तावेज़ों में देख लें कि उधारकर्ता के रूप में किसका नाम दर्ज है। यह आयोग का निष्कर्ष है और इसके खिलाफ अपील की जा सकती है। किसी विनियमित ऋणदाता के खिलाफ शिकायत के लिए उधारकर्ता RBI से https://cms.rbi.org.in पर संपर्क कर सकते हैं।

स्रोत: Consumer commission order

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।