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कार्रवाई

पूर्व सिंडिकेट बैंक मैनेजर वी.एन. माथुर समेत पांच को PMLA में सजा

ED के अनुसार गाजियाबाद की विशेष अदालत ने सिंडिकेट बैंक के एक पूर्व शाखा प्रबंधक और चार सह-आरोपियों को मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी ठहराकर हर एक को तीन साल की सजा दी है।

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आधिकारिक स्रोतEnforcement Directorate
Timeline of the case: loans sanctioned in 2006-07 on forged sale deeds at Syndicate Bank's Gajraula branch, the Ghaziabad Special Court judgment of 3 November 2026 convicting five under the PMLA, and the ED announcement on 4 November 2026. Each got three years' rigorous imprisonment and a Rs 50,000 fine.
ओक्विलिया ग्राफ़िक। स्रोत: Enforcement Directorate press release, 4 November 2026

गाजियाबाद की एक विशेष अदालत ने सिंडिकेट बैंक की गजरौला शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक वी.एन. माथुर और चार सह-आरोपियों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी ठहराया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 4 नवंबर 2026 को यह जानकारी दी। 3 नवंबर 2026 के फैसले में विशेष न्यायाधीश, गाजियाबाद ने पांचों में से हर एक को तीन साल के सश्रम कारावास और 50,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई; जुर्माना न भरने पर तीन महीने का साधारण कारावास होगा।

क्या हुआ

ED के लखनऊ जोनल ऑफिस के अनुसार अदालत ने वी.एन. माथुर के साथ इसी मामले के चार निजी आरोपियों - राजीव कुमार, अरविंद चौधरी, अंकित चौधरी और प्रमोद कुमार - को दोषी ठहराया। केस नंबर 5/23 में उन्हें PMLA की Section 3 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी पाया गया, जिसकी सजा Section 4 में है।

ED की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), ACB गाजियाबाद द्वारा सिंडिकेट बैंक के मुख्य सतर्कता अधिकारी की शिकायत पर दर्ज दो FIR के आधार पर शुरू हुई थी। उस मूल मामले में विशेष न्यायाधीश, CBI कोर्ट नंबर 2, गाजियाबाद ने वी.एन. माथुर को IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दोषी ठहराया था और राजीव कुमार तथा प्रमोद कुमार को बरी कर दिया था। ED ने कहा कि अब उसके द्वारा रिकॉर्ड पर रखे गए सबूतों के आधार पर इन दोनों को मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी ठहराया गया है।

ED के अनुसार 2006-07 के दौरान शाखा प्रबंधक ने अरविंद चौधरी, एक अन्य व्यक्ति (जिनकी मृत्यु हो चुकी है) और अन्य लोगों के साथ साजिश कर गैर-मौजूद संपत्तियों के जाली बिक्री दस्तावेजों, झूठे नॉन-एन्कम्ब्रेंस प्रमाणपत्रों और झूठी वैल्यूएशन रिपोर्टों के आधार पर उन्हें, उनकी फर्मों और सहयोगियों को लोन और ओवरड्राफ्ट लिमिट मंजूर कीं। ED ने कहा कि लोन की रकम नकद निकाली गई, उसका स्रोत छिपाने के लिए कई बचत खातों और डिमांड ड्राफ्ट से घुमाई गई और फिर संपत्ति खरीदने में लगाई गई, जिसमें J.P. नगर जिले के अलीपुर का एक प्लॉट और देहरादून का एक प्लॉट शामिल है।

इसका क्या मतलब है

यह अदालत द्वारा दी गई सजा है, केवल आरोप नहीं। जैसा ED ने बताया, मूल मामले में बरी होने से मनी लॉन्ड्रिंग का मामला खत्म नहीं हुआ: CBI मामले में बरी हुए दो आरोपी PMLA के तहत दोषी ठहराए गए। जिन ग्राहकों को किसी बैंक लोन या खाते में गड़बड़ी का संदेह हो, वे पहले अपने बैंक से और फिर RBI से https://cms.rbi.org.in पर शिकायत कर सकते हैं।

स्रोत: Enforcement Directorate press release

यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।

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