कानूनी
चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग: Omaxe देरी वाला फ्लैट सौंपे और 9% ब्याज दे
चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 2021 में मिलने वाला फ्लैट न देने पर Omaxe New Chandigarh Developers को सेवा में कमी का दोषी माना और दो महीने में कब्ज़ा व 9% मुआवज़ा देने का आदेश दिया।
चंडीगढ़ के राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (U.T. चंडीगढ़) ने Omaxe New Chandigarh Developers Pvt. Ltd. को एक घर खरीदार को देरी से चल रहा फ्लैट दो महीने के भीतर सौंपने और देरी के मुआवज़े के रूप में 9% सालाना देने का आदेश दिया है। 15 अक्टूबर 2026 के आदेश में आयोग ने डेवलपर को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी माना।
क्या हुआ
खरीदार ने 2018 में पंजाब के SAS नगर ज़िले के मुल्लांपुर में डेवलपर के प्रोजेक्ट "The Lake" में 2,300 वर्ग फुट का फ्लैट बुक किया था और 58.07 लाख रुपये चुकाए थे। समझौते के अनुसार कब्ज़ा 31 जुलाई 2021 तक मिलना था, लेकिन आदेश के अनुसार बहस की सुनवाई तक भी कब्ज़े की पेशकश नहीं की गई थी।
डेवलपर ने COVID-19 को फोर्स मेज्योर, यानी अपने नियंत्रण से बाहर की घटना, बताया। आयोग ने 2020 के केंद्र सरकार के एक कार्यालय ज्ञापन के अनुरूप नौ महीने की छूट दी, जिससे कब्ज़े की तारीख 30 अप्रैल 2022 हो गई। आयोग ने पाया कि उस तारीख के बाद की देरी समझाने के लिए डेवलपर ने कोई प्रगति रिपोर्ट या अन्य सबूत पेश नहीं किया।
आयोग ने खरीदार को निवेशक बताने वाला तर्क खारिज कर दिया और कहा कि सिर्फ दूसरी संपत्ति होने से खरीद व्यावसायिक नहीं हो जाती। आयोग ने कहा कि कब्ज़ा न देना लगातार जारी गलती है, इसलिए शिकायत समय सीमा के भीतर है। आयोग ने यह भी कहा कि कंपनी के डायरेक्टर कंपनी के साथ संयुक्त रूप से और अलग-अलग जिम्मेदार हैं।
इसका क्या मतलब है
डेवलपर को आदेश मिलने के दो महीने के भीतर, समझौते के अनुसार बाकी कीमत मिलने पर और बिना देरी शुल्क लिए, ऑक्यूपेशन और कंप्लीशन सर्टिफिकेट के साथ पूरा फ्लैट सौंपना होगा। उसे 30 अप्रैल 2022 से 30 सितंबर 2026 की अवधि के लिए प्राप्त राशि पर 9% सालाना 30 दिन के भीतर देना होगा, वरना इस रकम पर 12% ब्याज लगेगा। 1 अक्टूबर 2026 से कब्ज़ा मिलने तक उसे हर महीने अगले महीने की 10 तारीख तक 9% सालाना की दर से भुगतान करना होगा। इसके अलावा 75,000 रुपये मुआवज़ा और 35,000 रुपये मुकदमे का खर्च देना होगा। इस आदेश के खिलाफ अपील की जा सकती है।
लंबी देरी झेल रहे घर खरीदारों के लिए यह फैसला बताता है कि COVID-19 की छूट सीमित है और आगे की देरी के कारण डेवलपर को साबित करने होंगे। घर खरीदार National Consumer Helpline (1915) या e-Daakhil के ज़रिए मदद ले सकते हैं।
स्रोत: Consumer commission order
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