कार्रवाई

लोन धोखाधड़ी मामले में CBI अदालत ने Canara Bank के दो पूर्व अधिकारियों समेत 11 को 4 साल की सज़ा दी

शिमला की विशेष CBI अदालत ने Canara Bank के दो पूर्व अधिकारियों और Colour Camp Industries समेत 11 दोषियों को बैंक धोखाधड़ी मामले में चार साल के सश्रम कारावास की सज़ा सुनाई है।

Oquilia Newsroom2 मिनट में पढ़ेंRead in English
आधिकारिक स्रोतCentral Bureau of Investigation
कार्रवाई / 16 अक्टूबर 2026

शिमला की विशेष CBI अदालत ने 14 अक्टूबर 2026 को एक बैंक धोखाधड़ी मामले में Canara Bank के दो पूर्व अधिकारियों और कंपनी Colour Camp Industries समेत 11 दोषियों को चार साल के सश्रम कारावास की सज़ा सुनाई। अदालत ने कुल 19.75 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। मामला हिमाचल प्रदेश के सोलन ज़िले में Canara Bank की बद्दी शाखा से मंज़ूर कर्ज़ से जुड़ा है।

क्या हुआ

CBI के अनुसार, 11 दोषियों में कंपनी, Canara Bank की बद्दी शाखा में उस समय तैनात एक चीफ मैनेजर और एक अधिकारी, और आठ निजी व्यक्ति शामिल हैं। सश्रम कारावास का मतलब है ऐसी जेल की सज़ा जिसमें कठोर श्रम शामिल होता है।

CBI ने यह मामला 8 मई 2012 को दर्ज किया था। CBI का कहना था कि आरोपियों ने अक्टूबर 2008 से मार्च 2009 के बीच जाली दस्तावेज़ों के आधार पर Canara Bank की बद्दी शाखा को धोखा देने के लिए आपराधिक साज़िश रची। CBI के अनुसार, यह Color Camp Industries Private Limited को 7 करोड़ रुपये के वर्किंग कैपिटल लोन और 91 लाख रुपये के टर्म लोन की मंज़ूरी और वितरण से जुड़ा था। वर्किंग कैपिटल लोन कारोबार की रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए होता है, जबकि टर्म लोन तय अवधि में चुकाया जाता है।

CBI ने यह भी आरोप लगाया था कि कंपनी के 4.87 करोड़ रुपये के विदेशी विनिमय बिल, जिन्हें बैंक ने डिस्काउंट किया था, आयातकों से वसूल नहीं हुए। बिल डिस्काउंट करने का मतलब है कि बैंक निर्यातक को पहले भुगतान कर देता है और बाद में विदेशी खरीदार से पैसा वसूलता है।

जांच के बाद CBI ने बैंक अधिकारियों और निजी कर्ज़दारों व व्यक्तियों के खिलाफ शिमला में CBI के विशेष न्यायाधीश की अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। सुनवाई के बाद अदालत ने 30 सितंबर 2026 को सभी 11 आरोपियों को दोषी ठहराया और 14 अक्टूबर 2026 को सज़ा सुनाई।

इसका क्या मतलब है

इस फैसले के साथ उस मामले की सुनवाई पूरी हुई जिसे CBI ने मई 2012 में दर्ज किया था। अदालत ने शाखा में तैनात दोनों बैंक अधिकारियों, निजी कर्ज़दारों और व्यक्तियों, और कर्ज़ लेने वाली कंपनी को दोषी ठहराकर उन्हें जेल और जुर्माने की सज़ा दी है। जमाकर्ताओं और कर्ज़दारों के लिए, अदालत के इस फैसले से दिखता है कि कर्ज़ मंज़ूरी से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में बैंक के अपने अधिकारियों को भी कर्ज़दारों के साथ आपराधिक रूप से ज़िम्मेदार ठहराया गया।

स्रोत: CBI press release

यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।

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