कार्रवाई
होमबायर मामलों में CBI की 22वीं चार्जशीट, Geotech Promoters के खिलाफ
CBI ने Geotech Promoters Pvt Ltd और उसके प्रमोटर-डायरेक्टर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। CBI का आरोप है कि ग्रेटर नोएडा (वेस्ट) के Geotech Blessings प्रोजेक्ट में घर खरीदारों से धोखाधड़ी की गई।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ग्रेटर नोएडा (वेस्ट), उत्तर प्रदेश के सेक्टर 1 में स्थित हाउसिंग प्रोजेक्ट "Geotech Blessings" को लेकर Geotech Promoters Pvt Ltd और उसके प्रमोटर-डायरेक्टर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। CBI ने 28 अक्टूबर 2026 को इसकी जानकारी दी और बताया कि घर खरीदारों से जुड़े मामलों में यह उसकी 22वीं चार्जशीट है।
क्या हुआ
CBI के अनुसार, उसकी जांच में पाया गया कि बिल्डर कंपनी और उसके प्रमोटर-डायरेक्टर ने कथित रूप से झूठे आश्वासन और गलत बयानों के जरिए घर खरीदारों को लुभाया और गैरकानूनी व धोखे वाले तरीकों से आर्थिक लाभ लिया। यह प्रोजेक्ट गौतम बुद्ध नगर जिले में ग्रेटर नोएडा (वेस्ट) के सेक्टर 1 के प्लॉट नंबर GH-16A पर है।
CBI ने कहा कि चार्जशीट सक्षम अदालत में भारतीय दंड संहिता के आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात से जुड़े प्रावधानों के तहत दाखिल की गई है। चार्जशीट जांच के बाद एजेंसी का औपचारिक मामला होता है, जिसे अदालत के सामने रखा जाता है; इसके बाद अदालत तय करती है कि आरोप तय करके मुकदमा चलाया जाए या नहीं।
एजेंसी ने बताया कि वह सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दर्ज 30 अन्य मामलों की भी जांच कर रही है। ये मामले देश भर की विभिन्न बिल्डर कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ हैं, जिनमें घर खरीदारों से कथित धोखाधड़ी और पैसे के कथित डायवर्जन के आरोप हैं।
इसी सिलसिले में CBI ने कहा कि वह अब तक दूसरे बिल्डरों के खिलाफ 21 चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिनमें Jaypee Infratech Ltd, Ajnara India Ltd, Earthcon Universal Infratech Pvt Ltd, Ozone Urbana Infra Developers Pvt Ltd और Acme Realities Private Ltd शामिल हैं। कुछ बैंकों और वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की गई है।
ये आरोप हैं, दोष के निष्कर्ष नहीं; अदालत में दोष साबित होने तक आरोपी निर्दोष माने जाते हैं, और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
इसका क्या मतलब है
Geotech Blessings के खरीदारों के लिए अब मामला अदालत में जाएगा, जो CBI के सबूतों की जांच करेगी। आपराधिक मामला अपने आप में पैसा वापस नहीं दिलाता या फ्लैट नहीं सौंपता; यह मुकदमे के नतीजे और किसी अलग कार्यवाही पर निर्भर करता है। देरी वाले प्रोजेक्ट के घर खरीदार अपने राज्य के रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण से भी संपर्क कर सकते हैं, और नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (1915) या e-Daakhil के जरिए उपभोक्ता शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
स्रोत: CBI press release
यह रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड पर मौजूद नियामकीय कार्रवाइयों और आरोपों का विवरण है, जो उद्धृत अधिकारियों के हवाले से दी गई है। कोई आदेश, एफआईआर या चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है; दोष सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं।
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