कानूनी
बॉम्बे हाई कोर्ट का आदेश: तहसीलदार Canara Bank को गिरवी फैक्ट्री का कब्जा दिलाएं
बॉम्बे हाई कोर्ट ने 12 अक्टूबर 2026 को रायगढ़ के एक तहसीलदार को निर्देश दिया कि वे खुद गिरवी फैक्ट्री का कब्जा लेकर Canara Bank को सौंपें, क्योंकि 2023 का SARFAESI आदेश अब तक लागू नहीं हुआ था।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने 12 अक्टूबर 2026 को रायगढ़ जिले के खालापुर के तहसीलदार को निर्देश दिया कि वे खुद एक गिरवी फैक्ट्री का भौतिक कब्जा लेकर Canara Bank को सौंपें। कोर्ट ने कहा कि अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट, रायगढ़ ने 8 अगस्त 2023 को कब्जे का जो आदेश दिया था, वह अब तक लागू नहीं हुआ है। कोर्ट ने कब्जा लेने के लिए 19 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की।
क्या हुआ
बैंक की याचिका के अनुसार, उसने Balaji Precision Tubes (India) Pvt. Ltd. को कर्ज दिया था, जिसने खालापुर में अपनी फैक्ट्री की जमीन और इमारत गिरवी रखी थी। बैंक के मुताबिक, 29 जनवरी 2020 को यह कर्ज एनपीए (डिफॉल्ट वाला कर्ज) घोषित हुआ, जिसके बाद बैंक ने SARFAESI Act के तहत कार्रवाई की। यह कानून बैंकों को सिविल कोर्ट गए बिना गिरवी संपत्ति पर कार्रवाई की अनुमति देता है।
बैंक ने कोर्ट को बताया कि 29 अगस्त 2025 को फैक्ट्री 5.27 करोड़ रुपये में और 14 अगस्त 2026 को प्लांट व मशीनरी 1.86 करोड़ रुपये में नीलाम हुई। ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT) ने 30 जून 2026 को कर्जदार की चुनौती खारिज कर दी और हाई कोर्ट ने 4 अगस्त 2026 को एक और याचिका खारिज की। बैंक के अनुसार, इसके बाद तहसीलदार ने दूसरे सरकारी काम का हवाला देकर कब्जे की तारीख तय नहीं की।
कोर्ट ने कहा कि तहसीलदार यह काम किसी अधीनस्थ अधिकारी को नहीं सौंप सकते। कोर्ट ने अपने पुराने फैसले का हवाला दिया कि SARFAESI Act की धारा 14 के हर आदेश को चार हफ्ते के भीतर लागू किया जाना चाहिए। कोर्ट ने महिला कांस्टेबलों समेत पुलिस सुरक्षा देने और पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग का निर्देश दिया। कर्जदारों और गारंटरों को परिसर खाली कर सहयोग करने को कहा गया और चेतावनी दी गई कि बाधा डालने पर अवमानना की कार्यवाही समेत सख्त कार्रवाई होगी। कब्जा न लेने पर अधिकारियों को खुद कोर्ट में हाजिर होकर हलफनामा देना होगा। मामला 29 अक्टूबर 2026 को अनुपालन के लिए सूचीबद्ध है।
इसका क्या मतलब है
यह फैसला दोहराता है कि धारा 14 के तहत जिला प्राधिकरण का कब्जा आदेश आने के बाद स्थानीय अधिकारियों से उसे जल्दी और खुद लागू करने की अपेक्षा है। कर्जदारों के लिए इसका मतलब है कि अमल में देरी को कर्जदाता हाई कोर्ट में चुनौती दे सकता है। जिन कर्जदारों को लगता है कि बैंक ने अनुचित कार्रवाई की है, वे बैंक की शिकायत व्यवस्था और समाधान न होने पर RBI के शिकायत पोर्टल https://cms.rbi.org.in पर शिकायत कर सकते हैं।
स्रोत: High Court judgment
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