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आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट: चार कर्जदाता वसूली के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाएं, जोर-जबरदस्ती नहीं
आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने Axis Bank, SBI Cards, ICICI Bank और IndusInd Bank को एक कर्जदार का बकाया वसूलने के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया।
आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने चार कर्जदाताओं को निर्देश दिया है कि वे एक कर्जदार का बकाया केवल कानून द्वारा मान्य प्रक्रिया से वसूलें, जोर-जबरदस्ती के तरीकों से नहीं। 29 अक्टूबर 2026 के आदेश में अदालत ने अनंतपुर के एक कर्जदार की रिट याचिका का निपटारा किया, जो भारतीय रिजर्व बैंक और कई बैंकों व कर्ज देने वाली कंपनियों समेत 15 प्रतिवादियों के खिलाफ थी।
क्या हुआ
कर्जदार ने आरोप लगाया था कि कर्जदाताओं ने RBI के 12 अगस्त 2022 के दिशानिर्देशों का पालन किए बिना उसके घर लोन रिकवरी एजेंट भेजकर, लगातार फोन करके और पड़ोसियों के सामने अपमानित करके उसे और उसके परिवार को परेशान किया। उसने अदालत से इन जबरन वसूली की कार्रवाइयों को अवैध घोषित करने और कर्जदाताओं को खाते नियमित करने के लिए समय देने के उसके अनुरोध पर विचार करने का निर्देश देने की मांग की थी।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि बाहुबली की तरह काम करने वाले रिकवरी एजेंट रखने की प्रथा निंदनीय है, और कर्जदार के डिफॉल्ट करने पर बैंक को कानूनी प्रक्रिया अपनानी चाहिए। चूंकि कर्जदाताओं ने कहा कि उन्होंने कभी एजेंट नहीं भेजे और वे कानून का पालन करना चाहते हैं, इसलिए अदालत ने मामला लंबित रखने का कोई मकसद नहीं देखा।
अदालत ने Axis Bank, SBI Cards, ICICI Bank और IndusInd Bank को निर्देश दिया कि अगर कर्जदार ने डिफॉल्ट किया है तो वे कानूनी प्रक्रिया अपनाएं, और कहा कि वे कानून के अनुसार बकाया वसूलने के लिए स्वतंत्र हैं। बाकी दस प्रतिवादियों, जिनमें बजाज फाइनेंस, नवी फिनसर्व, Yes Bank और DBS Bank शामिल हैं, के मामले में अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर भरोसा किया कि निजी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी या निजी व्यावसायिक इकाई के खिलाफ रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। अदालत ने कर्जदार को उनके खिलाफ उपयुक्त मंच पर उपाय तलाशने की छूट दी।
इसका क्या मतलब है
यह आदेश कोई बकाया माफ नहीं करता; कर्जदाता बकाया वसूल सकते हैं, लेकिन केवल कानूनी तरीकों से। इससे यह भी पता चलता है कि निजी कर्ज देने वाली कंपनियों के खिलाफ हाई कोर्ट में रिट याचिका शायद न चले, इसलिए कर्जदारों को दूसरे मंच पर जाना पड़ सकता है। अपमानजनक वसूली कॉल या घर आने का सामना कर रहे कर्जदार पहले कर्जदाता से और फिर RBI से https://cms.rbi.org.in पर शिकायत कर सकते हैं। धमकी या डराने-धमकाने की शिकायत पुलिस से, और ऑनलाइन उत्पीड़न की शिकायत cybercrime.gov.in या हेल्पलाइन 1930 पर की जा सकती है।
स्रोत: High Court judgment
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