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इलाहाबाद हाई कोर्ट: सब्सिडी वाले MSME लोन का सेटलमेंट SBI नहीं ठुकरा सकता

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार के ब्याज देने भर से SBI स्वरोजगार लोन के वन-टाइम सेटलमेंट से इनकार नहीं कर सकता, और दो महीने में फैसला करने का आदेश दिया।

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आधिकारिक स्रोतAllahabad High Court
Inner block of the Allahabad High Court with a red roof and gardens

फ़ोटो: Subhashish Panigrahi / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (क्रॉप की गई)। फ़ाइल फ़ोटो।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 22 अक्टूबर 2026 को कहा कि State Bank of India (SBI) किसी छोटे स्वरोजगार लोन के वन-टाइम सेटलमेंट पर विचार करने से सिर्फ इस आधार पर इनकार नहीं कर सकता कि लोन ऐसी सरकारी योजना में दिया गया था जिसमें ब्याज का कुछ हिस्सा राज्य सरकार देती है। कोर्ट ने मिर्जापुर में SBI के रीजनल मैनेजर को निर्देश दिया कि वे दो महीने के भीतर कर्जदार के अनुरोध पर कारण सहित आदेश पारित करें, और तब तक जबरन वसूली पर रोक लगा दी।

क्या हुआ

एक कर्जदार ने मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत कागज की प्लेट बनाने की छोटी इकाई लगाने के लिए SBI से 3,02,000 रुपये का लोन लिया था। उनकी याचिका के अनुसार बैंक ने मशीन सप्लायर को सीधे भुगतान किया। उनका आरोप था कि सप्लायर ने पहले मशीन के लिए 1,28,000 रुपये का कोटेशन दिया, लेकिन बाद में 2,25,000 रुपये के कोटेशन पर मशीन दी, और मशीन बार-बार खराब होती रही। कोर्ट ने इन दावों पर कोई फैसला नहीं दिया। उन्होंने बैंक से मशीन वापस लेने, लोन के वन-टाइम सेटलमेंट (OTS, यानी बातचीत से लोन खाता बंद करना) और सब्सिडी के समायोजन पर विचार करने को कहा था।

SBI की दलील थी कि लोन MSME योजना में दिया गया था जिसमें ब्याज राज्य सरकार वहन करती है, इसलिए OTS उपलब्ध नहीं है। दो जजों की बेंच ने यह दलील नहीं मानी। सुप्रीम कोर्ट के 2024 के Pro Knits बनाम Canara Bank फैसले के आधार पर कोर्ट ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के पुनरुद्धार और पुनर्वास का ढांचा बैंकों पर बाध्यकारी है और उसमें OTS का विकल्प बना रहता है। कोर्ट ने कहा कि राज्य द्वारा ब्याज का भुगतान सब्सिडी के हिसाब या सेटलमेंट की शर्तों पर असर डाल सकता है, लेकिन अपने आप में यह पूरी तरह रोक नहीं है।

इसका क्या मतलब है

सरकारी स्वरोजगार योजनाओं के छोटे कर्जदारों के लिए इस फैसले का मतलब है कि बैंक को सीधे इनकार करने के बजाय यह जांचना होगा कि लागू ढांचे के तहत सेटलमेंट, पुनर्गठन या अन्य कौन-सी मदद दी जा सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि उद्यम को सही समय पर अपना MSME दर्जा और पात्रता साबित करनी होगी।

यह आदेश सेटलमेंट मंजूर नहीं करता; SBI को कर्जदार को सुनकर मशीन की शिकायत, सब्सिडी और सेटलमेंट के विकल्प पर फैसला करना होगा। आदेश की तारीख से तीन महीने तक या बैंक के फैसले तक, जो भी पहले हो, कोई जबरन वसूली नहीं होगी। लोन खाते से जुड़ी बैंक की शिकायत RBI के पोर्टल https://cms.rbi.org.in पर की जा सकती है।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।