OquiliaOquilia

कानूनी

इलाहाबाद हाई कोर्ट: SBI के खिलाफ उधारकर्ता का SARFAESI केस DRT लखनऊ सुन सकता है

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 28 अक्टूबर 2026 को SBI की याचिका खारिज कर कहा कि DRT लखनऊ उधारकर्ता की चुनौती सुन सकता है, क्योंकि बैंक का SARFAESI मांग नोटिस लखनऊ से जारी हुआ था।

Oquilia Newsroom2 मिनट में पढ़ेंRead in English
आधिकारिक स्रोतAllahabad High Court
Inner block of the Allahabad High Court with a red roof and gardens

फ़ोटो: Subhashish Panigrahi / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (क्रॉप की गई)। फ़ाइल फ़ोटो।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने 28 अक्टूबर 2026 को State Bank of India (SBI) की याचिका खारिज कर दी और कहा कि लखनऊ का डेट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) बैंक की वसूली कार्रवाई के खिलाफ एक उधारकर्ता की चुनौती सुन सकता है। कोर्ट ने कहा कि बैंक ने SARFAESI Act के तहत अपना मांग नोटिस लखनऊ से जारी किया था, इसलिए वाद का कारण आंशिक रूप से वहीं पैदा हुआ।

क्या हुआ

फैसले के अनुसार, SBI की वाराणसी शाखा ने 2004 में उधारकर्ता को क्रेडिट सुविधाएं दीं, जिनके बदले वाराणसी और बिहार की संपत्तियां गिरवी रखी गईं। खाता 15 जुलाई 2016 को NPA घोषित हुआ और बैंक की लखनऊ स्थित स्ट्रेस्ड एसेट्स मैनेजमेंट ब्रांच को सौंपा गया। 1 सितंबर 2017 को उस शाखा ने SARFAESI Act की धारा 13(2) के तहत नोटिस जारी कर 65,41,35,169 रुपये, यानी लगभग 65.41 करोड़ रुपये की मांग की। बाद में खाता नई दिल्ली की एक शाखा में भेज दिया गया।

उधारकर्ता ने बिहार के एक जिलाधिकारी के 10 अगस्त 2026 के आदेश को DRT लखनऊ में चुनौती दी। SBI ने आपत्ति की कि DRT लखनऊ का क्षेत्राधिकार नहीं बनता और मामला प्रयागराज, बिहार या नई दिल्ली में होना चाहिए। DRT लखनऊ ने 10 सितंबर 2026 को यह आपत्ति खारिज कर दी।

हाई कोर्ट ने कहा कि SARFAESI Act की धारा 17(1A) उधारकर्ता को वहां आवेदन करने देती है जहां वाद का कारण पूरी तरह या आंशिक रूप से पैदा हो, जहां गिरवी संपत्ति हो, या जहां खाता रखने वाला बैंक कार्यालय हो। इसी कोर्ट की एक बड़ी बेंच के फैसले के आधार पर कोर्ट ने कहा कि धारा 13(2) का नोटिस बाद की वसूली कार्रवाई से जुड़ी कड़ी है। चूंकि नोटिस लखनऊ से आया था, इसलिए DRT लखनऊ का क्षेत्राधिकार बनता है।

इसका क्या मतलब है

SARFAESI कार्रवाई का सामना कर रहे उधारकर्ताओं के लिए यह फैसला पुष्टि करता है कि उनके पास एक से ज्यादा ट्रिब्यूनल का विकल्प हो सकता है। लोन खाता किसी दूसरी शाखा या शहर में भेज देने से उस ट्रिब्यूनल का क्षेत्राधिकार अपने आप खत्म नहीं होता, जहां से मांग नोटिस जारी हुआ था।

कोर्ट ने उधारकर्ता की मूल चुनौती पर फैसला नहीं दिया; वह DRT लखनऊ के सामने लंबित है। बैंक की सेवा से जुड़ी शिकायत के लिए उधारकर्ता RBI से https://cms.rbi.org.in पर भी संपर्क कर सकते हैं।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।