कानूनी
उत्तराखंड उपभोक्ता आयोग: पुरानी Yamaha बाइक नई बताकर बेचने पर डीलर ज़िम्मेदार
उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता आयोग ने माना कि हरिद्वार के एक डीलर ने पहले बिक चुकी मोटरसाइकिल नई बताकर बेची, और गाड़ी बदलने या रकम लौटाने का आदेश दिया।
उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने हरिद्वार के एक मोटरसाइकिल डीलर को एक खरीदार को ऐसी मोटरसाइकिल नई बताकर बेचने का ज़िम्मेदार ठहराया है, जो पहले ही किसी और को बेची जा चुकी थी। 30 अक्टूबर 2026 को सुनाए गए आदेश में आयोग ने डीलर Dev Motor को मोटरसाइकिल बदलने या उसकी कीमत लौटाने का निर्देश दिया, और निर्माता India Yamaha Motor से कहा कि वह तीन महीने के भीतर ऐसा कराने में मदद करे।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार, खरीदार ने 25 मई 2015 को Yamaha FZ मोटरसाइकिल के लिए 82,935 रुपये चुकाए थे, साथ ही पंजीकरण के लिए 3,318 रुपये और बीमे के लिए 2,226 रुपये। उन्होंने इंजन में आवाज़ की शिकायत की, जो बार-बार सर्विसिंग के बाद भी ठीक नहीं हुई। जब उन्होंने नोटिस भेजा, तो निर्माता ने जवाब दिया कि उसके रिकॉर्ड के अनुसार यही मोटरसाइकिल 31 मार्च 2015 को किसी अन्य व्यक्ति को बेची गई थी।
हरिद्वार के ज़िला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम ने 7 दिसंबर 2018 को खरीदार के पक्ष में फैसला दिया था। उसने नई मोटरसाइकिल या शिकायत की तारीख से 6% सालाना ब्याज के साथ कीमत, और मुकदमे के खर्च के लिए 5,000 रुपये देने का आदेश दिया था। India Yamaha Motor ने इसके खिलाफ अपील की।
राज्य आयोग ने पाया कि डीलर के अपने पत्र में पहली बिक्री दर्ज थी, और उस पत्र में लिखे इंजन और चेसिस नंबर खरीदार के पंजीकरण प्रमाणपत्र से मेल खाते थे। आयोग ने माना कि गाड़ी की पिछली बिक्री और इस्तेमाल की जानकारी छिपाकर उसे बेचना डीलर की ओर से सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है। आयोग ने यह भी पाया कि किसी विशेषज्ञ साक्ष्य से निर्माण दोष साबित नहीं हुआ, और निर्माता की संलिप्तता के सबूत के बिना उसे डीलर के आचरण के लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
आयोग ने अपील आंशिक रूप से स्वीकार की। उसने डीलर से ज़िला फोरम के आदेश का पालन करने को कहा, और India Yamaha Motor को निर्देश दिया कि वह तीन महीने के भीतर गाड़ी बदलने या रकम लौटाने में मदद के लिए अपने नियंत्रण वाले कदम उठाए। अपील के लिए निर्माता की जमा राशि आदेश का पालन होने तक जारी नहीं की जाएगी।
इसका क्या मतलब है
नई गाड़ी खरीदते समय जांच लें कि पंजीकरण प्रमाणपत्र में कोई पिछला मालिक दर्ज न हो, और इंजन व चेसिस नंबर बिक्री के बिल से मिलाएं। जिस खरीदार को पुरानी गाड़ी नई बताकर बेची गई हो, वह राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) पर शिकायत कर सकता है या e-Daakhil पर मामला दर्ज कर सकता है। इस आदेश के खिलाफ अपील की जा सकती है।
स्रोत: Consumer commission order
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