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तेलंगाना उपभोक्ता आयोग: Care Health ने बिना नोटिस पॉलिसी रद्द कर गलत किया

तेलंगाना राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 23 अक्टूबर 2026 को कहा कि Care Health Insurance ने पोर्ट की गई स्वास्थ्य पॉलिसी जरूरी नोटिस दिए बिना रद्द की, और उसकी अपील खारिज कर दी।

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आधिकारिक स्रोतConsumer commission
A handwritten insurance note from 1857 on aged paper

फ़ोटो: Wikimedia Commons, public domain (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।

तेलंगाना राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 23 अक्टूबर 2026 को Care Health Insurance की अपील खारिज कर दी और वह आदेश बरकरार रखा जिसमें कंपनी को 70 वर्षीय पॉलिसीधारक की स्वास्थ्य पॉलिसी का नवीनीकरण करने को कहा गया था। कंपनी ने पहले से मौजूद बीमारी छिपाने का आरोप लगाकर पॉलिसी रद्द कर दी थी। आयोग ने कहा कि पॉलिसीधारक ने अपनी स्वास्थ्य स्थिति नहीं छिपाई और बीमा कंपनी ने अपनी ही शर्तों में जरूरी लिखित नोटिस दिए बिना पॉलिसी रद्द की।

क्या हुआ

आदेश के अनुसार, पॉलिसीधारक के पास 31 दिसंबर 2015 से The Oriental Insurance Company की 5 लाख रुपये की ग्रुप स्वास्थ्य पॉलिसी थी, जिसे बाद में उन्होंने 85,522 रुपये का प्रीमियम देकर 10 लाख रुपये की बीमा राशि के साथ Care Health में पोर्ट कराया। 19 से 22 जुलाई 2023 तक उनका अस्पताल में इलाज हुआ। बीमा कंपनी ने कैशलेस इलाज से इनकार किया और बाद में उनका रीइंबर्समेंट दावा खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि उन्होंने दिसंबर 2020 से पेशाब संबंधी समस्या की दवा लेने की बात नहीं बताई थी। कंपनी ने 1 फरवरी 2024 को पॉलिसी रद्द कर दी।

जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-I, हैदराबाद ने 3 अप्रैल 2025 को बीमा कंपनी को प्रीमियम लेकर पॉलिसी का नवीनीकरण करने और 45 दिन के भीतर 20,000 रुपये मुआवजा और 10,000 रुपये खर्च देने का आदेश दिया था।

राज्य आयोग ने नोट किया कि कैंसर की पुष्टि 10 दिसंबर 2021 की बायोप्सी रिपोर्ट में हुई, जो 17 जनवरी 2021 को पॉलिसी शुरू होने के बाद की है। प्रस्ताव फॉर्म में केवल पांच सवाल थे, जिनमें लक्षणों या दवा के बारे में कोई सवाल नहीं था, और पॉलिसीधारक ने पहले से मौजूद बीमारी वाले सवाल का जवाब "हां" दिया था। आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी ने ब्योरा मांगे बिना पॉलिसी जारी की, इसलिए वह बाद में बीमारी छिपाने का आरोप नहीं लगा सकती। आयोग ने यह भी कहा कि पॉलिसी के मुताबिक जानकारी न देने पर रद्द करने से पहले 15 दिन का लिखित नोटिस जरूरी था, जो नहीं दिया गया।

इसका क्या मतलब है

पॉलिसीधारकों के लिए यह आदेश कहता है कि बीमा कंपनी जानकारी न देने के आधार पर पॉलिसी रद्द नहीं कर सकती, जब उसने संबंधित सवाल पूछा ही न हो, या जब प्रस्तावक के पहले से मौजूद बीमारी बताने के बाद भी उसने पॉलिसी जारी की हो। जहां पॉलिसी में रद्द करने से पहले नोटिस जरूरी है, वहां बिना नोटिस रद्द करना सेवा में कमी है। गलत तरीके से दावा खारिज होने या पॉलिसी रद्द होने पर पॉलिसीधारक राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) पर संपर्क कर सकते हैं या e-Daakhil के जरिए शिकायत दर्ज कर सकते हैं। आयोग के आदेश के खिलाफ अपील की जा सकती है।

स्रोत: Consumer commission order

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।