कानूनी
तेलंगाना उपभोक्ता आयोग ने केयर हेल्थ के खिलाफ 5.29 लाख रुपये का क्लेम बरकरार रखा
तेलंगाना राज्य उपभोक्ता आयोग ने केयर हेल्थ इंश्योरेंस की अपील खारिज करते हुए कहा कि पहले से मौजूद बीमारी के सवाल पर हां कहने वाले वरिष्ठ नागरिक ने कुछ नहीं छिपाया।

फ़ोटो: Chris Woodrich / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0 (क्रॉप की गई)। सांकेतिक तस्वीर।
तेलंगाना राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 23 अक्टूबर 2026 को केयर हेल्थ इंश्योरेंस की अपील खारिज कर दी और 70 साल के एक पॉलिसीधारक को सर्जरी के लिए 6% ब्याज के साथ 5,29,024 रुपये देने का आदेश बरकरार रखा। आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर पाई कि उन्होंने कोई अहम तथ्य छिपाया।
क्या हुआ
आदेश के अनुसार, पॉलिसीधारक ने दिसंबर 2015 में ओरिएंटल इंश्योरेंस से 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा लिया था और जनवरी 2021 में इसे केयर हेल्थ में पोर्ट कराकर बीमा राशि 10 लाख रुपये कर दी। जुलाई 2023 में हैदराबाद में उनकी प्रोस्टेट कैंसर की सर्जरी हुई और कैशलेस इलाज से इनकार के बाद उन्होंने 5,29,024 रुपये का अस्पताल बिल खुद चुकाया। केयर हेल्थ ने पहले से मौजूद बीमारी छिपाने के आधार पर कैशलेस अनुरोध ठुकराया, और बाद में 2020 के इलाज के रिकॉर्ड न भेजने पर 18 अक्टूबर 2023 को रीइम्बर्समेंट क्लेम भी खारिज कर दिया।
आयोग ने कहा कि कैंसर की पुष्टि दिसंबर 2021 की बायोप्सी रिपोर्ट से हुई, जो केयर हेल्थ पॉलिसी शुरू होने के बाद की है, इसलिए उनसे इसकी जानकारी की उम्मीद नहीं की जा सकती थी। प्रस्ताव फॉर्म में सिर्फ पांच सवाल थे और लक्षणों या दवाओं पर कोई सवाल नहीं था, और उन्होंने पहले से मौजूद बीमारी के सवाल पर हां कहा था। आयोग ने माना कि बीमा कंपनी ने आगे कुछ पूछे बिना पॉलिसी जारी की, इसलिए वह बाद में जानकारी छिपाने की दलील नहीं दे सकती।
आयोग ने यह भी कहा कि पोर्ट कराने पर पॉलिसीधारक के वेटिंग पीरियड के क्रेडिट बने रहते हैं, और यह क्लेम 2015 से चले आ रहे 5 लाख रुपये के मूल कवर के भीतर आता है। कैंसर के इलाज पर 2.5 लाख रुपये की सीमा की बीमा कंपनी की नई दलील आयोग ने खारिज कर दी, क्योंकि यह आधार न तो क्लेम ठुकराने के पत्र में था और न ही उसके जवाब में।
जिला आयोग का 3 अप्रैल 2025 का आदेश कायम है: 22 जुलाई 2023 से 6% ब्याज के साथ 5,29,024 रुपये, 20,000 रुपये मुआवजा और 10,000 रुपये खर्च।
इसका क्या मतलब है
आदेश कहता है कि पहले से मौजूद बीमारी के सवाल पर हां मिलने के बाद भी बिना पूछताछ प्रस्ताव स्वीकार करने वाली बीमा कंपनी जानकारी छिपाने के आधार पर क्लेम नहीं ठुकरा सकती, और क्लेम ठुकराने के पत्र के बाद नए आधार नहीं जोड़ सकती। पॉलिसी पोर्ट कराने वाले पॉलिसीधारकों को पहले के कवर वाले सालों का फायदा मिलता रहता है। इस आदेश के खिलाफ अपील की जा सकती है। शिकायत e-Daakhil या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 के जरिए की जा सकती है।
स्रोत: Consumer commission order
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