कानूनी
सुप्रीम कोर्ट ने GSTAAD Hotels और Neo Capricorn Plaza की दिवाला प्रक्रिया बरकरार रखी
सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर 2026 को GSTAAD Hotels और Neo Capricorn Plaza के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया बरकरार रखी और कहा कि कर्ज डिफॉल्ट साबित होने पर मुनाफा कोई बचाव नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु के JW Marriott होटल की मालिक GSTAAD Hotels Pvt. Ltd. और पुणे के Crowne Plaza होटल की मालिक Neo Capricorn Plaza Pvt. Ltd. के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया को बरकरार रखा। अदालत ने प्रमोटरों की अपीलें खारिज कर दीं और कहा कि कर्ज में डिफॉल्ट साबित होने पर कंपनी का मुनाफे में होना कोई बचाव नहीं है।
क्या हुआ
फैसले के अनुसार, Piramal Finance ने 2017 में दोनों कंपनियों को 600 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था, और बाद में कंपनियों ने सरकार की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) के तहत और कर्ज लिए। दिसंबर 2022 में ये कर्ज Omkara Asset Reconstruction Pvt. Ltd. को सौंप दिए गए, जिसने फरवरी 2023 में GSTAAD Hotels से करीब 666.53 करोड़ रुपये और Neo Capricorn Plaza से करीब 119.99 करोड़ रुपये वापस मांगे।
मुंबई स्थित नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने 8 जुलाई 2025 को दोनों कंपनियों को दिवाला प्रक्रिया में शामिल किया, जबकि इससे पहले का प्रवेश आदेश दोबारा सुनवाई के लिए वापस भेजा गया था। नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने 19 अगस्त 2025 को यह आदेश बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कर्जदाता की दिवाला अर्जी स्वीकार करने की सुनवाई संक्षिप्त होती है, और ट्रिब्यूनल को सिर्फ कर्ज और डिफॉल्ट का होना देखना है, खातों के हर रुपये का मिलान नहीं करना है। अदालत ने कहा कि इन्फॉर्मेशन यूटिलिटी, यानी कर्ज के आंकड़ों के विनियमित भंडार, में दर्ज डिफॉल्ट का रिकॉर्ड अपने आप में पर्याप्त है और इसे सिर्फ स्पष्ट और ठोस सामग्री से ही खारिज किया जा सकता है, केवल इनकार से नहीं। अदालत ने कहा कि परिचालन मुनाफा यह नहीं बताता कि कंपनी समय पर कर्जदाताओं को भुगतान कर सकती है, और उसने बताया कि GSTAAD Hotels के अपने खातों में 2022-23 के लिए डेट सर्विस कवरेज रेशियो 0.12 था। अदालत ने यह भी नोट किया कि अप्रैल 2026 में अधिसूचित इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के संशोधन के बाद डिफॉल्ट साबित होने पर ट्रिब्यूनल के लिए अर्जी स्वीकार करना अनिवार्य है।
इसका क्या मतलब है
अदालत के निर्देश के अनुसार, दोनों होटल कंपनियों की दिवाला प्रक्रिया अब आगे बढ़ेगी। अदालत के तर्क के अनुसार, यह फैसला कर्जदारों के लिए मुनाफे का हवाला देकर या खातों की प्रविष्टियों पर विवाद करके कर्जदाता की दिवाला अर्जी का विरोध करना मुश्किल बनाता है।
कर्जदाताओं, कर्जदारों और गारंटरों के लिए यह फैसला पुष्ट करता है कि कोड के तहत प्रक्रिया शुरू होने का आधार डिफॉल्ट है, न कि बैलेंस शीट का दिवालियापन। सुप्रीम कोर्ट का फैसला होने के नाते यह अंतिम है।
स्रोत: Supreme Court order
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