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सुप्रीम कोर्ट: Section 143(2) नोटिस के बिना आयकर रीअसेसमेंट अवैध

सुप्रीम कोर्ट ने 28 अक्टूबर 2026 को कहा कि Section 143(2) का नोटिस जारी न होने पर रीअसेसमेंट टिकता नहीं, भले ही करदाता ने बिना आपत्ति कार्यवाही में हिस्सा लिया हो।

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आधिकारिक स्रोतSupreme Court of India
टैक्स / 28 अक्टूबर 2026

सुप्रीम कोर्ट ने 28 अक्टूबर 2026 को कहा कि अगर असेसिंग ऑफिसर ने आयकर अधिनियम, 1961 की Section 143(2) के तहत नोटिस जारी ही नहीं किया, तो आयकर पुनर्मूल्यांकन (रीअसेसमेंट) अवैध है, भले ही करदाता ने बिना आपत्ति के कार्यवाही में हिस्सा लिया हो। कोर्ट ने ओडिशा माइनिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड और एक व्यक्तिगत करदाता के खिलाफ प्रधान आयकर आयुक्त, भुवनेश्वर की अपीलें खारिज कर दीं।

क्या हुआ

फैसले के अनुसार, आयकर विभाग ने पूरे हो चुके असेसमेंट Section 147 के तहत दोबारा खोले और Section 148 के तहत नोटिस जारी किए। ओडिशा माइनिंग कॉर्पोरेशन के लिए असेसमेंट वर्ष 2008-09, 2010-11 और 2011-12 तथा व्यक्तिगत करदाता के लिए 2009-10 और 2010-11 इसमें शामिल थे। ओडिशा माइनिंग कॉर्पोरेशन ने कहा कि उसके मूल रिटर्न को ही Section 148 के नोटिस का जवाब माना जाए। यह माना गया कि Section 143(2) का कोई नोटिस जारी नहीं हुआ; अधिकारी ने रीअसेसमेंट आदेश पारित करने से पहले केवल Section 142(1) के तहत दस्तावेज मांगने वाले नोटिस भेजे।

आयकर आयुक्त (अपील) ने करदाताओं की आपत्ति खारिज कर दी, लेकिन आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने रीअसेसमेंट आदेश रद्द कर दिए और हाई कोर्ट ने न्यायाधिकरण के फैसले को सही ठहराया। सुप्रीम कोर्ट को इस नजरिए में कोई कमी नहीं मिली।

कोर्ट ने कहा कि Section 292BB, जो करदाता के कार्यवाही में शामिल होने पर नोटिस को सही ढंग से तामील माना जाता है, केवल उस नोटिस की तामील की कमियों पर लागू होती है जो वास्तव में भेजा गया हो। जहां नोटिस जारी ही नहीं हुआ, वहां यह प्रावधान बचाव नहीं करता। करदाता के पुराने रिटर्न पर भरोसा करने पर भी नोटिस जारी करने की विभाग की जिम्मेदारी बनी रहती है, और कार्यवाही के दौरान Section 142(1) के तहत भेजा गया पत्र काफी नहीं है। 2010 के Hotel Blue Moon मामले में अपने फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि यह नोटिस न देना ऐसी प्रक्रियागत चूक नहीं है जिसे सुधारा जा सके।

इसका क्या मतलब है

जिन करदाताओं के पुराने असेसमेंट दोबारा खोले जाते हैं, उनके लिए यह फैसला पुष्टि करता है कि असेसिंग ऑफिसर को रीअसेसमेंट करने से पहले Section 143(2) का नोटिस देना ही होगा। कार्यवाही में हिस्सा लेने से इस नोटिस की कमी दूर नहीं होती, और कोर्ट ने कहा कि केवल पहले सहयोग करने के कारण करदाता को अधिनियम के तहत किसी भी कार्यवाही में यह आपत्ति उठाने से रोका नहीं जा सकता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि Section 148 का नोटिस पाने वाला करदाता केवल यह कह सकता है कि उसके पुराने रिटर्न को ही जवाब माना जाए, उसकी कॉपी दोबारा दाखिल करना जरूरी नहीं है।

स्रोत: Supreme Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।